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ट्रम्प की सख्ती के बीच रूस से रिश्ते मजबूत कर रहा भारत

मोदी ने बातचीत को 'बहुत अच्छी और विस्तृत' बताया और कहा कि उन्होंने पुतिन से यूक्रेन युद्ध के ताजा हालात और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 22 अक्टूबर 2024 को कज़ान, रूस में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। / Alexander Zemlianichenko/Pool via REUTERS

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 8 अगस्त को हुई फोन बातचीत महज औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अमेरिका के टैरिफ दबाव से पैदा हुई नई चुनौतियों की गूंज साफ सुनाई दी।

मोदी ने बातचीत को 'बहुत अच्छी और विस्तृत' बताया और कहा कि उन्होंने पुतिन से यूक्रेन युद्ध के ताजा हालात और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि वह जल्द ही पुतिन की मेज़बानी करेंगे।

ट्रम्प का अल्टीमेटम
इस कॉल के ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को तीन सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है: या तो रूस से तेल खरीद बंद करो या 25% का टैरिफ सीधे 50% कर दिया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर पूरा कर रहा है। रूस से तेल खरीद ने भारत को अरबों डॉलर बचाने में मदद की है और घरेलू ईंधन कीमतें स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन अब यह लाभ खतरे में है।

यूक्रेन पर फिर दोहराया भारत का रुख
सरकारी बयान के अनुसार, पीएम मोदी ने पुतिन से बातचीत के दौरान यूक्रेन संघर्ष पर भारत की पारंपरिक नीति दोहराई — कि इस संकट का समाधान 'शांतिपूर्ण वार्ता' से ही निकल सकता है।

यह भी पढ़ें- ट्रम्प के टैरिफ से नाराज भारत, US संग डिफेंस डील पर लगाया ब्रेकः रिपोर्ट

भारत के सामने चुनौती
भारत एक ओर रूस का पुराना रणनीतिक साझेदार है, हथियारों की आपूर्ति से लेकर रक्षा सहयोग तक। वहीं अमेरिका उसका प्रमुख व्यापारिक और भू-राजनीतिक सहयोगी है। ऐसे में ट्रम्प की आक्रामक टैरिफ नीति भारत को दो पाटों के बीच ला खड़ा करती है। भारत ने तर्क दिया है कि वह रूस से तेल इसलिए खरीद रहा है क्योंकि युद्ध के बाद पारंपरिक यूरोपीय आपूर्तियां वहां खिसक गई थीं। लेकिन अमेरिका अब इसे रूस के युद्ध फंडिंग का जरिया मानता है और भारत को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता खोजने का दबाव दे रहा है।

क्या खास था मोदी-पुतिन बातचीत में?
मोदी ने पुतिन को यूक्रेन युद्ध के घटनाक्रम साझा करने के लिए धन्यवाद दिया। पीएम ने इस साल के अंत में पुतिन के भारत दौरे की उम्मीद जताई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देने की बात की।

रूस की चेतावनी
क्रेमलिन ने भले ही ट्रम्प का नाम न लिया हो, लेकिन उसने साफ कहा है कि दूसरे देशों पर रूस से व्यापार न करने का दबाव बनाना अवैध और अनुचित है। पुतिन ने गुरुवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की, हालांकि इस मीटिंग की अंदरूनी जानकारी साझा नहीं की गई।

घरेलू मोर्चे पर मोदी का संदेश
मोदी ने 7 अगस्त को बिना अमेरिका का नाम लिए कहा था कि भारत अपने किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। कृषि भारत की रीढ़ है और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में यह एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

रूस और अमेरिका के बीच ट्रम्प और पुतिन की संभावित बैठक की तैयारी हो रही है, जिसकी तारीख और स्थान का एलान अभी नहीं हुआ है। लेकिन उससे पहले भारत को अपने रणनीतिक और आर्थिक संतुलन को साधने की कठिन परीक्षा से गुजरना होगा।

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