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अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी का भारत में रणनीतिक विस्तार, शुरू की नई पहल

इस पहल का उद्देश्य भारत में साझेदारी के जरिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान करते हुए शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करना है।

   उद्घाटन अवसर पर उपस्थित (बाएं से) हॉवर्ड आर ह्यूजेस प्रोवोस्ट एवं अकादमिक मामलों की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एमी डिटमार, एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) राममूर्ति रमेश, वाइस प्रेसिडेंट (ग्लोबल) कैरोलीन लेवेंडर और प्रेसिडेंट रेजिनाल्ड डेसरोचेस। उद्घाटन अवसर पर उपस्थित (बाएं से) हॉवर्ड आर ह्यूजेस प्रोवोस्ट एवं अकादमिक मामलों की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एमी डिटमार, एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) राममूर्ति रमेश, वाइस प्रेसिडेंट (ग्लोबल) कैरोलीन लेवेंडर और प्रेसिडेंट रेजिनाल्ड डेसरोचेस। / image: news.rice.edu

राइस यूनिवर्सिटी ने राइस ग्लोबल इंडिया की लॉन्चिंग के साथ भारत में अपने विस्तार की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत में साझेदारी के जरिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान करते हुए शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करना है।

भारत की टेक सिटी बेंगलुरु में उद्घाटन समारोह में राइस यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट रेजिनाल्ड डेसरोचेस ने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत को विशाल अवसरों वाला देश करार दिया। 

डेसरोचेस ने कहा कि हमारी वैश्विक उपस्थिति में लिहाज से भारत में यह साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है। हम वर्तमान कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत के अकादमिक लीडर्स और उद्योग जगत के साथ जुड़ने को लेकर उत्साहित हैं।

इस पहल का उद्देश्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग को गहरा बनाना है। इसके तहत छात्रों व फैकल्टी के आदान-प्रदान के अलावा संयुक्त अनुसंधान के साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और टिकाऊ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रोजेक्ट संचालित किए जाएंगे। 

राइस यूनिवर्सिटी में वाइस प्रेसिडेंट ग्लोबल कैरोलीन लेवेंडर ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी बाजारों में से एक है। भारत की यह स्थिति उसे राइस की वैश्विक दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाती है। 

उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत के बीच काफी महत्वपूर्ण संबंध हैं। उभरती प्रौद्योगिकियों पर यूएस-इंडिया इनिशिएटिव जैसी पहल जैसी पहलें शैक्षिक, तकनीकी एवं शोध संबंधी आदान-प्रदान के अवसर प्रदान कर रही हैं।

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