सोनम वांगचुक / IANS
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से लद्दाख स्थित सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत निरंतर रोधात्मक हिरासत पर पुनर्विचार करने का मौखिक निर्देश दिया।
कोर्ट में सुनवाई वांगचुक की पत्नी, डॉ. गीताांजली अंगमो द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर हुई, जिसमें उनकी हिरासत को "अवैध" और "मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला मनमाना कार्य" बताया गया है।
कोर्ट ने स्वास्थ्य पर जताई चिंता
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पी.बी. वराले की बेंच ने देखा कि वांगचुक 26 सितंबर 2025 से हिरासत में हैं, और कोर्ट को प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में उनकी सेहत "अच्छी नहीं" बताई गई। बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज से कहा कि सरकार को यह सोचने की जरूरत है कि वांगचुक की हिरासत जारी रखने का विकल्प फिर से परखा जा सकता है या नहीं।
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सरकार का रोधात्मक हिरासत का बचाव
ASG नटराज ने कोर्ट को बताया कि NSA एक विशेष कानून है जो सार्वजनिक व्यवस्था या राज्य की सुरक्षा के लिए रोधात्मक हिरासत के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हिरासत सजा नहीं, बल्कि डिटेनिंग अधिकारी के विवेक पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक का 24 सितंबर 2025 का भाषण उत्तेजक था, जिससे लेह में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें चार लोगों की मौत और 161 घायल हुए।
कोर्ट ने चेतावनी दी
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की बेंच ने कहा कि अगर हिरासत आदेश की नींव ही कानूनी रूप से कमजोर पाई गई, तो बाद में दी गई मंजूरियां इसे अलग से वैध नहीं कर सकतीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हिरासत आदेश रद्द किया गया तो सभी subsequent कार्रवाईयाँ भी रद्द हो जाएंगी।
स्वास्थ्य जांच का आदेश
पहली सुनवाई में कोर्ट ने वांगचुक की स्वास्थ्य चिंताओं को देखते हुए सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ को जांच करने और रिपोर्ट सीलबंद आवरण में जमा करने का आदेश दिया था।
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