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राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह भारतीय स्वतंत्रता सेनानी 'राजाजी' की प्रतिमा स्थापित

भारत की राष्ट्रपति ने बताया कि लुटियंस की प्रतिमा को राजगोपालाचारी की प्रतिमा से बदलना औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को त्यागने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

राष्ट्रपति भवन में भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण। / @narendramodi/X

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 'राजाजी उत्सव' की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर उन्होंने भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा राष्ट्रपति भवन के अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस पर स्थापित की गई है, जहां पहले एडविन लुटियंस की प्रतिमा लगी हुई थी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति ने इस कदम के महत्व को साझा किया। उन्होंने बताया कि लुटियंस की प्रतिमा को राजगोपालाचारी की प्रतिमा से बदलना औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को त्यागने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राष्ट्रपति के अनुसार, यह पहल भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और उन महान विभूतियों को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने भारत माता की सेवा में अपना असाधारण योगदान दिया है।

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प्रतिमा का यह अनावरण एक व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का प्रतीक है, जिसके तहत औपनिवेशिक युग की विरासतों से आगे बढ़कर उन प्रख्यात भारतीय नेताओं को पहचान दी जा रही है जिन्होंने देश के इतिहास को आकार दिया। 'राजाजी' के नाम से लोकप्रिय चक्रवर्ती राजगोपालाचारी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और विद्वान थे, जिन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल के रूप में अपनी सेवाएँ दी थीं।

इस भव्य समारोह में देश के कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे, जिनमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल थे। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने भी इस आयोजन को औपनिवेशिक विरासत से मुक्त होने की यात्रा में एक मील का पत्थर बताया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रतीकों को सम्मानित करने और गणतंत्र की प्रमुख संस्थाओं में भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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