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वैश्विक औसत से तेज भारत की कृषि, 4.4% ग्रोथ के साथ सेक्टर मजबूत

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वित्त वर्ष 2016 से 2025 के दशक के दौरान कृषि क्षेत्र की दशकवार वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पिछले दशकों की तुलना में सबसे अधिक है।

भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान / IANS

भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि बीते पांच वर्षों में भारत के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2016 से 2025 के दशक के दौरान कृषि क्षेत्र की दशकवार वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पिछले दशकों की तुलना में सबसे अधिक है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में भी कृषि क्षेत्र ने 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो इसकी मजबूती और लचीलेपन को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों, जिनमें ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) भी शामिल हैं, के बेहतर उत्पादन से हुई है।

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चौहान ने कहा, “आज भारत न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, बल्कि कई फसलों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका भी निभा रहा है।”

उन्होंने बताया कि कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि का सबसे चमकदार पक्ष बनकर उभरा है। बागवानी उत्पादन वित्त वर्ष 2013–14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 367.72 मिलियन टन हो गया है।

इस अवधि में फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का 219.67 मिलियन टन और अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा।

उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। वहीं, सब्जियों, फलों और आलू के उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसमें प्रत्येक श्रेणी में 12–13 प्रतिशत की वैश्विक हिस्सेदारी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि निरंतर नीतिगत फोकस, संस्थागत सुधारों और लक्षित निवेशों ने कृषि को मजबूत किया है और ग्रामीण भारत को रूपांतरित किया है।

उन्होंने ग्रामीण अवसंरचना में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र बसावटों को अब ऑल-वेदर सड़कों से जोड़ा जा चुका है।

उन्होंने बताया कि PMGSY-IV के तहत 10,000 किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, राजस्थान, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश की करीब 3,270 असंबद्ध बसावटों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।

‘हाउसिंग फॉर ऑल’ मिशन का जिक्र करते हुए चौहान ने कहा कि बीते 11 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 3.70 करोड़ पक्के घर बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत 4.14 करोड़ घरों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से अधिकांश को मंजूरी दी जा चुकी है।

डिजिटल पहलों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि SVAMITVA योजना के तहत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरे हो चुके हैं और 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए गए हैं। वहीं, डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 99.8 प्रतिशत भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।

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