अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा / (Photo courtesy IMF MD Georgieva X handle
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आज भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य पर अपनी मुहर लगाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को इसका मुख्य चालक बताया। नई दिल्ली में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' को संबोधित करते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि यदि भारत AI की शक्ति का सही उपयोग करता है, तो वह 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का अपना महत्वाकांक्षी लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकता है।
आईएमएफ प्रमुख ने शिखर सम्मेलन में चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए कहा कि AI तकनीक में वैश्विक जीडीपी विकास दर को सालाना 0.8 प्रतिशत तक बढ़ाने की क्षमता है। उन्होंने कहा, "यह वृद्धि दर कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर से भी अधिक होगी, जो दुनिया भर में करोड़ों नए रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा करेगी।"
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भारत की 'डिजिटल ताकत' और युवा शक्ति
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और आधार (Aadhaar) को वैश्विक स्तर पर तकनीक के लोकतांत्रीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उनके अनुसार, इस मजबूत डिजिटल ढांचे ने न केवल नए व्यवसायों और उद्यमिता के लिए मार्ग प्रशस्त किया है, बल्कि व्यापार शुरू करने की राह में आने वाली जटिल बाधाओं को भी न्यूनतम कर दिया है। भारत की विशाल युवा आबादी की ऊर्जा और उनकी नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की क्षमता को उन्होंने देश की सबसे बड़ी ताकत बताया, जो भारत को वैश्विक स्तर पर नवाचार (Innovation) का केंद्र बनाती है। इसके साथ ही, उन्होंने श्रम बाजार और GST जैसे कर सुधारों को दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि ये संरचनात्मक बदलाव भारत को आगामी 'एआई युग' की चुनौतियों और अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार करते हैं।
'रोजगार की सुनामी': एक गंभीर चेतावनी
जॉर्जीवा ने एआई के उदय को श्रम बाजार के लिए एक "सुनामी" के समान बताया है, जो वैश्विक कार्यबल की संरचना को मौलिक रूप से बदल सकता है। उनके विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर की लगभग 40% नौकरियां इस तकनीकी बदलाव की चपेट में होंगी, जिसमें विकसित देशों के लिए यह जोखिम 60% तक और भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए लगभग 26% रहने का अनुमान है। विशेष रूप से 'एंट्री-लेवल' और नियमित क्लर्कियल कार्यों पर सबसे गहरा संकट मंडरा रहा है, क्योंकि आधुनिक एआई मॉडल अब उन तार्किक और प्रशासनिक कार्यों को करने में सक्षम हैं जो कभी मानव श्रम का आधार थे। जॉर्जीवा की यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि यदि नीति निर्माताओं ने समय रहते कौशल विकास और सुरक्षा प्रणालियों में निवेश नहीं किया, तो एआई का यह प्रभाव समाज में आर्थिक खाई को और अधिक गहरा कर सकता है।
भविष्य के लिए तीन सूत्रीय 'एक्शन प्लान'
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा प्रस्तावित यह तीन सूत्रीय 'एक्शन प्लान' भारत की $30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की राह में आने वाली चुनौतियों का एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। इस योजना का पहला स्तंभ शिक्षा का कायाकल्प है, जो छात्रों को केवल सूचनाएं रटने के बजाय भविष्य की अनिश्चित तकनीकों के अनुरूप खुद को ढालने (के लिए तैयार करेगा। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सुरक्षा है, जिसके तहत डेनमार्क के 'फ्लेक्सिक्यूरिटि' मॉडल की तर्ज पर एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार करने का सुझाव दिया गया है जो तकनीकी बदलावों के कारण नौकरी खोने वाले श्रमिकों को आर्थिक संबल और पुनर्कौशल (Reskilling) के अवसर प्रदान करे। अंत में, समान अवसर सुनिश्चित करने की रणनीति यह रेखांकित करती है कि एआई का लाभ केवल उच्च-तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग, विशेषकर मध्यम और निम्न आय वाले लोगों तक पहुंचे, ताकि यह तकनीक समावेशी विकास का माध्यम बने न कि आर्थिक असमानता का कारण।
भारत के लिए ऐतिहासिक मोड़
जॉर्जीवा ने अपने भाषण का समापन यह कहते हुए किया कि भारत वर्तमान में एक "निर्णायक मोड़" पर खड़ा है। जहाँ दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती का सामना कर रही हैं, वहीं भारत अपनी साहसिक नीतियों और तकनीकी नवाचार के दम पर दुनिया का 'ग्रोथ इंजन' बना हुआ है।
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