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हिमाचल प्रदेश CM सुक्खू ने होम-स्टे रजिस्ट्रेशन पोर्टल किया लॉन्च

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होटल मालिकों और होम-स्टे संचालकों को हरसंभव सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि अनावश्यक नौकरशाही अड़चनों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित न हो।

कैबिनेट मीटिंग लेते हुए हिमाचल सीएम सुक्खू / X/Sukhvinder Singh Sukhu

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को होम-स्टे पंजीकरण के लिए समर्पित पोर्टल http://homestay.hp.gov.in  लॉन्च किया। यह पोर्टल प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

नए प्लेटफॉर्म के जरिए होम-स्टे संचालक अब अपने घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होटल मालिकों और होम-स्टे संचालकों को हरसंभव सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि अनावश्यक नौकरशाही अड़चनों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित न हो।

आतिथ्य उद्योग को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के नाम पर होम-स्टे के पंजीकरण के नवीनीकरण में कोई रुकावट नहीं डाली जाए। उन्होंने पर्यटन विभाग को ऐसे मामलों में अस्थायी पंजीकरण देने के निर्देश दिए, ताकि व्यवसाय संचालन और रखरखाव बिना किसी उत्पीड़न या बेवजह की बाधा के जारी रह सके।

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मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि होम-स्टे योजना सरकार की स्व-रोजगार को बढ़ावा देने की रणनीति का एक अहम स्तंभ है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करना और प्रदेश के अनछुए व कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों तक सैलानियों को आकर्षित करना है।

इन संभावनाओं को और मजबूत करने के लिए सरकार ने योजना का दायरा शहरी क्षेत्रों तक भी बढ़ा दिया है। अब शहरी इलाकों में छह कमरों तक की क्षमता वाले होम-स्टे भी पंजीकृत किए जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे पर्यटकों को एक अलग और प्रामाणिक अनुभव प्रदान करते हैं, जहां पारंपरिक गांव की वास्तुकला और स्थानीय खान-पान की झलक मिलती है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक व्यंजन परोसने से खासकर विदेशी पर्यटकों का अनुभव समृद्ध होता है और स्थानीय गृहस्वामियों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।

इस क्षेत्र को और प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री ने ब्याज सब्सिडी योजना का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य पर्यटन इकाइयों की स्थापना, विस्तार और उन्नयन में लोगों की मदद करना है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में तीन प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में चार प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी टर्म लोन पर दी जा रही है।

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