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‘सेवा तीर्थ’ से बदलेगा शासन का स्वरूप: मोदी ने बताया विकसित भारत की नई पहचान

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये आधुनिक परिसर नागरिक-केन्द्रित शासन और राष्ट्रीय प्रगति के प्रतीक हैं तथा औपनिवेशिक मानसिकता से स्पष्ट रूप से अलग नई सोच को दर्शाते हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी / Narendra Modi's X account

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ परिसरों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये आधुनिक परिसर नागरिक-केन्द्रित शासन और राष्ट्रीय प्रगति के प्रतीक हैं तथा औपनिवेशिक मानसिकता से स्पष्ट रूप से अलग नई सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ब्रिटिश शासन के दौरान रायसीना हिल्स पर बने साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति और प्रभुत्व दिखाने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। ये संरचनाएं ऊंचाई पर इस तरह स्थापित की गई थीं कि वे शासन की दूरी और श्रेष्ठता को दर्शाएं।

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इसके विपरीत, ‘सेवा तीर्थ’ को ज़मीन से जुड़ा बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह जनता के साथ निकटता और विनम्रता का प्रतीक है। यहां से लिए जाने वाले निर्णय अब किसी शासक की इच्छा नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए होंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में आधुनिक अवसंरचना की आवश्यकता थी, क्योंकि पुरानी इमारतें स्थान की कमी और सीमित सुविधाओं के कारण नई जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही थीं। ‘सेवा तीर्थ’ नाम स्वयं सेवा को तीर्थ के रूप में स्थापित करता है, जहां संकल्प को कर्म में बदला जाता है।

उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन आत्ममंथन करें कि उनका कार्य आम नागरिक के जीवन को कितना सरल बना रहा है। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारों की इमारत कर्तव्य की नींव पर ही खड़ी होती है और कर्तव्य ही करोड़ों सपनों को साकार करने का प्रारंभिक बिंदु है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन नए परिसरों में कार्य करने वाले कर्मचारी सेवा, समर्पण और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के विकास में नई ऊर्जा का संचार करेंगे।

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