प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS File Photo
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में मिलावटी दूध के सेवन से हुई चार लोगों की मौत पर राज्य सरकार ने गहरा दुख जताया है। सोमवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में घोषणा की कि इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये (10,994 अमेरिकी डॉलर) का मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत दर्दनाक बताते हुए पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और आश्वासन दिया कि अस्पतालों में उपचाराधीन सभी मरीजों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।
विधानसभा में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राजमुंदरी के दो क्षेत्रों में नरसपुरम गांव की 'वरलक्ष्मी मिल्क डेयरी' द्वारा हर दिन 106 परिवारों को दूध की आपूर्ति की जाती थी। इस दूध को पीने के बाद लोगों में उल्टी, पेट दर्द और डायलिसिस जैसी गंभीर समस्याएं देखी गईं। चिकित्सकीय परीक्षणों में मरीजों के खून में यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस डेयरी का दूध पीने के बाद ही लोग बीमार हुए। अब तक इस घटना में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 अन्य का इलाज चल रहा है, जिनमें से दो वेंटिलेटर पर हैं।
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मुख्यमंत्री नायडू ने दोषियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बताया कि डेयरी मैनेजर अड्डाला ज्ञानेश्वर राव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पीड़ितों के रक्त के नमूने और दूध के सैंपल जांच के लिए हैदराबाद और विशाखापट्टनम की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई केवल पैसों के लालच में मिलावटखोरी जैसे अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सरकार कठोरतम कार्रवाई करेगी।
हालात पर काबू पाने के लिए खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत राजमुंदरी पहुंचने और स्थिति की निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों के हर सदस्य की जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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