अदाणी एंटरप्राइजेज / IANS
अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा है कि वह ईरान से जुड़े संभावित प्रतिबंध उल्लंघन के मामले में अमेरिकी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। यह बयान उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि कंपनी ने ईरानी तेल उत्पादों का आयात किया हो सकता है।
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जून में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अमेरिकी अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अदाणी ग्रुप से जुड़ी इकाइयों ने मुंद्रा बंदरगाह के जरिए ईरानी मूल की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात किया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि ईंधन की ढुलाई में इस्तेमाल किए गए कई टैंकरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
10 फरवरी को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में अदाणी एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसे पिछले सप्ताह अमेरिका के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से “जानकारी के लिए अनुरोध” प्राप्त हुआ है। OFAC अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली वह संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुपालन को लागू करती है।
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कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह अनुरोध तब आया, जब उसने पिछले वर्ष आई मीडिया रिपोर्ट के बाद स्वयं पहल करते हुए स्वेच्छा से OFAC से संपर्क किया था।
अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा कि “अत्यधिक सावधानी बरतते हुए और सहयोग के तहत” उसने 2 जून को ही सभी एलपीजी आयात रोक दिए थे। यही वह दिन था, जब वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, OFAC ने कंपनी को बताया है कि वह उन लेन-देन की सिविल जांच कर रहा है, जो अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से हुए और जिनमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान या ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले व्यक्तियों के हित शामिल हो सकते हैं।
हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि OFAC ने किस तरह की जानकारी मांगी है, लेकिन उसने यह जरूर कहा कि एजेंसी के साथ हुए पत्राचार में “किसी भी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की कोई पुष्टि नहीं की गई है।”
अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा कि वह OFAC के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है और मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराएगी।
इससे पहले भी अदाणी ग्रुप ने ईरानी मूल की एलपीजी के व्यापार या प्रतिबंधों से बचने के किसी भी “जानबूझकर किए गए प्रयास” से इनकार किया था।
कंपनी ने कहा कि जिस खेप का जिक्र मीडिया रिपोर्ट में किया गया है, वह “थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स के जरिए एक नियमित व्यावसायिक लेन-देन” के तहत लाई गई थी और उसके साथ मौजूद दस्तावेजों में ओमान के सोहर बंदरगाह को पोर्ट ऑफ ओरिजिन बताया गया था।
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