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H-1B वीजा पर नए शुल्क का असर कम, वर्कर्स की अभी भी मांग: स्टडी

स्टडी में बोर्जस ने बताया कि "औसत H-1B वर्कर अमेरिकी जन्म के कर्मचारियों से लगभग 16 प्रतिशत कम कमाते हैं," जबकि शिक्षा, उम्र, लिंग, और पेशे में समानता होती है।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉर्ज बोर्जस / Manhattan institute

नेशनल ब्यूरो ऑफ़ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER) ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉर्ज बोर्जस की स्टडी ‘THE H-1B WAGE GAP, VISA FEES, AND EMPLOYER DEMAND’ प्रकाशित की है। इसमें सामने आया है कि H-1B वीजा पर $100,000 का नया शुल्क लगने के बावजूद अमेरिकी कंपनियां उच्च-कुशल H-1B वर्कर्स को हायर करना जारी रख सकती हैं।

स्टडी में बोर्जस ने बताया कि "औसत H-1B वर्कर अमेरिकी जन्म के कर्मचारियों से लगभग 16 प्रतिशत कम कमाते हैं," जबकि शिक्षा, उम्र, लिंग, और पेशे में समानता होती है।

कंपनियों के दृष्टिकोण से देखा जाए तो, उच्च-कुशल H-1B वर्कर आम तौर पर $100,000 से अधिक वार्षिक कमाते हैं, इसलिए $100,000 शुल्क के बावजूद कंपनियों को लाभ होगा। बोर्जस के अनुसार, छह साल की वीजा अवधि में एक H-1B हायर करने पर औसत पे-सेविंग लगभग $100,000 होती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि $150,000 से $200,000 तक का शुल्क भी हायरिंग संख्या पर ज्यादा असर नहीं डालेगा, क्योंकि कंपनियां H-1B वर्कर को हायर करने के लिए शुल्क देने को तैयार होंगी। साथ ही, यह शुल्क $10 से $20 बिलियन तक वार्षिक राजस्व पैदा कर सकता है और H-1B वर्कर्स की कौशल संरचना को और उच्च बना सकता है।

बोर्जस ने यह भी उल्लेख किया कि H-1B वर्कर्स की मांग पर कंपनियों का नियंत्रण अधिक होता है क्योंकि उन्हें किसी विशेष कर्मचारी के लिए अस्थायी रोजगार अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा, 85,000 नए वीजा की वार्षिक कैप इसे एक दुर्लभ और मूल्यवान संसाधन बनाती है।

स्टडी में निष्कर्ष निकाला गया है कि उच्च-कुशल अप्रवासी प्रवाह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ होता है।

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