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भारतीय मूल की अभिरामी मशीन लर्निंग से डार्क मैटर की खोज में बनीं मददगार

हरिलाल डार्क मैटर से जुड़े दुर्लभ कण संकेतों की पहचान को बेहतर बनाने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करती हैं।

अभिरामी हरिलाल / Carnegie Mellon University

भारतीय मूल की भौतिक विज्ञानी और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा अभिरामी हरिलाल ने CERN में चल रहे एक शोध में योगदान दिया है। इस शोध का उद्देश्य डार्क मैटर से जुड़े नए कणों की पहचान करना है, जो ब्रह्मांड के सबसे कम समझे गए घटकों में से एक है।

हरिलाल ने अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता से भौतिकी विषय में पूरी की। इसके बाद उन्होंने CERN में चार साल बिताए, जहां उन्होंने 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' से प्राप्त डेटा पर काम किया। उन्होंने मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके भौतिक वैज्ञानिकों द्वारा दुर्लभ कणों के संकेतों का पता लगाने के तरीके को बेहतर बनाया, जिससे चल रहे प्रयोगों की संवेदनशीलता में वृद्धि हुई।

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