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जब ए. आर. रहमान बने भारत के पहले गोल्डन ग्लोब विजेता

अल्लाह-रक्खा रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु के चेन्नई में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था।

 एआर रहमान एआर रहमान / ARR/instagram

भारत के लिए 11 जनवरी 2009 का दिन भारतीय संगीत के इतिहास में बहुत खास माना जाता है। इस दिन प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान ने गोल्डन ग्लोब अवार्ड जीतकर अपनी कला और प्रतिभा का एक और शानदार प्रमाण दिया। उनके लिए यह एक गर्व का पल था, क्योंकि यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय संगीतकार थे। रहमान की संगीत यात्रा प्रेरणादायक रही है। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। 

अल्लाह-रक्खा रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु के चेन्नई में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन संगीत के प्रति उनकी रुचि और लगन ने उन्हें कभी पीछे नहीं हटने दिया। छोटी सी उम्र में ही उन्होंने संगीत सीखना शुरू कर दिया। उनके माता-पिता ने उनकी कला को बढ़ावा दिया और रहमान ने कीबोर्ड और पियानो पर महारत हासिल की।

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रहमान ने अपने करियर की शुरुआत फिल्मों के लिए संगीत देने से की। बतौर संगीत निर्देशक 1992 में उनकी पहली बड़ी हिट फिल्म 'रोजा' आई। इस फिल्म का संगीत लोगों को बहुत पसंद आया और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। 'रोजा' के गानों ने उन्हें सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी प्रसिद्ध कर दिया। इसके बाद उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें लगातार सफलता दिलाई।

ए. आर. रहमान संगीतकार के साथ-साथ एक अच्छे गायक भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी और कई गाने खुद गाए। उनकी शैली बहुत ही अलग थी, और लोग उनके गानों को तुरंत पहचान जाते थे। उन्होंने बॉलीवुड और तमिल सिनेमा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया। 'दिल से', 'लगान', 'स्वदेश', और 'जोधा अकबर' जैसी फिल्मों के लिए उनके संगीत को लोग आज भी याद करते हैं।

उनकी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में से एक 2009 में गोल्डन ग्लोब जीतना था। इस पुरस्कार के लिए उन्हें 'जोधा अकबर' फिल्म के लिए जाना गया था। इस पुरस्कार ने साबित कर दिया कि भारतीय संगीतकार भी विश्व स्तर पर अपनी कला के लिए मान्यता पा सकते हैं। यह पुरस्कार उनके करियर का एक अहम पड़ाव था और उनके लिए एक नई ऊंचाई लेकर आया।

रहमान ने अपने करियर में कई बड़े पुरस्कार और सम्मान जीते। उन्हें दो बार ऑस्कर अवार्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा ग्रैमी, बाफ्टा और कई राष्ट्रीय पुरस्कार उनके नाम हैं। उन्होंने फिल्मों के अलावा व्यक्तिगत एल्बम और कई चैरिटी प्रोजेक्ट्स में भी योगदान दिया। उनका संगीत हमेशा नई सोच और आधुनिकता के साथ पारंपरिक भारतीय धुनों का मिश्रण रहा।

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