फिल्म का पोस्टर / Handout
भारतीय-अमेरिकी फिल्ममेकर मुकेश मोदी की हिमालयी ड्रामा फिल्म 'खूंटा' ने कोलकाता में आयोजित इंडियन मूवी अवार्ड्स में 'बेस्ट इंडियन फीचर फिल्म' का अवॉर्ड जीता है। यह अवॉर्ड 'खूंटा' को मई में कान्स फिल्म फेस्टिवल में मार्केट प्रीमियर स्क्रीनिंग और उसके बाद 2026 लंदन इंडिपेंडेंट फिल्म अवार्ड्स में 'बेस्ट फॉरेन फीचर फिल्म' का अवॉर्ड जीतने के बाद मिला है।
अनुशी शर्मा द्वारा लिखित और निर्देशित तथा न्यूयॉर्क में रहने वाले मोदी द्वारा प्रोड्यूस की गई 'खूंटा' फिल्म हिमालय के एक गांव पर आधारित है। यह फिल्म आस्था, परंपरा, पहचान और आधुनिकीकरण व पर्यावरण में बदलाव से पैदा हुए तनावों के इर्द-गिर्द घूमती है।
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'खूंटा' की कहानी एक ऐसी महिला के बारे में है जो अपने लापता पति का इंतजार कर रही है, जबकि उसका गांव सामाजिक और पर्यावरणीय बदलावों से गुजर रहा है। अपनी कहानी के जरिए, यह फिल्म आस्था, यादों, प्रकृति और अनिश्चितता का सामना कर रही जीवन-शैली के बीच के रिश्तों को दिखाती है।
यह फिल्म हिमाचल प्रदेश के गिरीपार क्षेत्र से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है, जिसमें हाटी और गद्दी समुदाय तथा जौनसारी संस्कृति शामिल है। साथ ही, यह महासू महाराज से जुड़ी आध्यात्मिक परंपराओं से भी प्रेरित है।
फिल्म में अभिनय करने वाली शर्मा, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई की रहने वाली हैं। 'खूंटा' के साथ उनका सफर इस क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं पर आधारित एक कहानी से शुरू हुआ और आखिरकार 16 मई, 2026 को फिल्म कान्स फिल्म मार्केट तक पहुंची। कान्स में फिल्म की स्क्रीनिंग को हिमाचल की फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक अहम पल माना गया, क्योंकि यह राज्य की पहली फिल्म थी जो कान्स के मंच तक पहुंची।
फिल्म बनाने वालों ने हिमालयी जीवन को असलियत के साथ दिखाने पर भी जोर दिया। कान्स स्क्रीनिंग से पहले आई खबरों के मुताबिक, फिल्म की कास्ट में हिमाचली कलाकार शामिल हैं, जबकि कॉस्ट्यूम गांव के घरों से लिए गए या स्थानीय दर्जियों से बनवाए गए। फिल्म की सेटिंग और किरदारों का मकसद हिमालय को सिर्फ बैकग्राउंड के तौर पर दिखाना नहीं, बल्कि उस इलाके की बोली, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को दिखाना है।
फिल्म में पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं भी एक अहम पहलू हैं। इसकी कहानी हिमालय के नाज़ुक इकोसिस्टम पर इंसानी दखल के असर को दिखाती है, जिसमें बाढ़, भूस्खलन और इकोलॉजिकल असंतुलन जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पहाड़ी समुदायों पर असर डालते हैं।
लंदन में अवॉर्ड मिलने के बाद, मोदी ने कहा कि यह फिल्म लोगों और प्रकृति के रिश्ते का संदेश देने के लिए बनाई गई थी। मोदी ने कहा कि खूंटा को सिर्फ एक फिल्म के तौर पर नहीं, बल्कि एक संदेश के तौर पर बनाया गया था। हम चाहते थे कि दर्शक प्रकृति की सुंदरता को महसूस करें, उसकी ताकत को समझें और उसकी रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी को पहचानें।
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