प्रतीकात्मक तस्वीर / pexels
निजी ट्रेलरों की लंबी कतार, पर्सनल शेफ, पांच सितारा होटल और दर्जनों लोगों का निजी स्टाफ - बॉलीवुड के बड़े सितारों की “अत्यधिक” मांगें अब फिल्म निर्माण की लागत को बेकाबू कर रही हैं। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यही वजह है कि भारतीय फिल्म उद्योग की आर्थिक सेहत लगातार कमजोर होती जा रही है।
बॉलीवुड का बॉक्स ऑफिस हमेशा से अनिश्चित रहा है और कोविड महामारी ने हालात और बिगाड़ दिए। लेकिन निर्माताओं का मानना है कि आज के भारी नुकसान की असली वजह रचनात्मक असफलता नहीं, बल्कि सितारों पर होने वाला बेहिसाब खर्च है। मशहूर ‘रेस’ फ्रेंचाइजी के निर्माता रमेश तौरानी कहते हैं, “यह समस्या सिर्फ प्रोडक्शन कॉस्ट की नहीं है, बल्कि स्टार फीस की है।” निर्माताओं और फिल्मकारों के मुताबिक, आजकल बड़े कलाकार शूटिंग पर 10–15 लोगों की टीम के साथ पहुंचते हैं। इसमें मेकअप आर्टिस्ट, हेयरड्रेसर, स्टाइलिस्ट, जिम ट्रेनर और पर्सनल असिस्टेंट शामिल होते हैं और इन सभी का खर्च प्रोडक्शन को उठाना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ सितारे एक फिल्म के लिए करीब 22 मिलियन डॉलर (करीब 180 करोड़ रुपये) तक फीस लेते हैं। इसके अलावा फर्स्ट क्लास या बिजनेस क्लास यात्रा, लग्जरी होटल, कई निजी वैनिटी वैन और सीमित काम के घंटे जैसी मांगें अब आम हो गई हैं। वरिष्ठ निर्माता मुकेश भट्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “भारी-भरकम सपोर्ट टीम, प्रीमियम यात्रा और लग्जरी ठहराव बजट को जरूरत से ज्यादा बढ़ा देते हैं, जबकि इनका रचनात्मक असर बहुत कम होता है। सितारों की मांगें सचमुच आपत्तिजनक हैं।”
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डिस्ट्रिब्यूटर और ट्रेड एनालिस्ट राज बंसल कहते हैं, “एक अभिनेता के साथ आमतौर पर 10 से 15 स्टाफ सदस्य होते हैं। पहले कलाकार एक वैनिटी वैन साझा कर लेते थे। फिर बड़े स्टार के लिए अलग वैनिटी वैन आई और मांगें लगातार बढ़ती चली गईं।” जानकारों के मुताबिक, एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक ही ट्रेलर का किराया करीब 18,000 डॉलर तक पहुंच सकता है। कुछ कलाकारों के लिए ज्यादा मांग करना अब स्टेटस सिंबल बन गया है।
महामारी के बाद बिगड़ा संतुलन
बॉलीवुड हमेशा से हाई-रिस्क इंडस्ट्री रही है, जहां हिट से ज्यादा फ्लॉप फिल्में बनती हैं। लेकिन निर्माताओं का कहना है कि अब सितारों पर होने वाला खर्च बॉक्स ऑफिस की कमाई से कहीं आगे निकल चुका है। कोरोना महामारी के बाद हालात और बिगड़े, जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने फिल्मों को ऊंचे दामों पर खरीदा। बाद में जब ये डील्स खत्म हुईं, तो आमदनी गिर गई, लेकिन सितारों की मांगें जस की तस बनी रहीं और यह समस्या आज भी जारी है। मुकेश भट्ट कहते हैं, “दर्शकों की सोच बदली है, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने विकल्प बढ़ाए हैं और क्षेत्रीय सिनेमा ने रचनात्मक स्तर ऊंचा किया है। लेकिन इसके साथ ही बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट, खासकर सितारों से जुड़ा बजट, उद्योग पर भारी दबाव बना रहा है। समस्या फिल्मों की नहीं, अर्थशास्त्र की है।”
आमिर खान का सवाल: ‘खुद्दारी कहां है?’
अभिनेता-फिल्मकार आमिर खान ने भी सितारों पर निशाना साधा। सितंबर में एक यूट्यूब शो में उन्होंने कहा, “आप करोड़ों में कमाते हैं। फिर आपकी खुद्दारी कहां है?”
घाटे की मिसाल और कुछ अपवाद
2024 में आई साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म ‘बड़े मियां छोटे मियां’ (अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ अभिनीत) का बजट करीब 42 मिलियन डॉलर बताया गया। टिकट खिड़की पर खराब प्रदर्शन के बाद खबरें आईं कि निर्माताओं को कर्ज चुकाने के लिए संपत्ति गिरवी रखनी पड़ी। हालांकि कुछ अपवाद भी हैं। अभिनेता कार्तिक आर्यन ने 2023 की फिल्म ‘शहजादा’ के फ्लॉप होने के बाद अपनी फीस छोड़ दी थी। उनका कहना था, “अगर आपकी स्टार वैल्यू और प्रोजेक्ट से पूरी टीम को मुनाफा होता है, तो गणित सही बैठता है। अगर नहीं, तो स्टार को भी कट लेना चाहिए।”
‘स्टार से बड़ी स्क्रिप्ट’
कई निर्माता अब पार्टनरशिप मॉडल की वकालत कर रहे हैं, जिसमें हिट होने पर सभी को फायदा और फ्लॉप होने पर नुकसान साझा हो। अभिनेता-लेखक-निर्माता विवेक वासवानी कहते हैं, “अगर स्टार की फीस और एंटोराज आपका बजट बिगाड़ रहा है, तो सितारे मत लीजिए। मैंने 40 नई प्रतिभाओं के साथ फिल्में बनाईं और सफल रहा। शाहरुख खान को मैंने तब लिया जब कोई उन्हें नहीं जानता था।”
वासवानी का कहना है कि शाहरुख खान और अक्षय कुमार जैसे सितारे अपने एंटोराज का खर्च खुद उठाते हैं और निर्माताओं पर बोझ नहीं डालते। “कई बड़े कलाकार ऐसा करते हैं। अगर आपको लगता है कि आपका स्टार आपकी स्क्रिप्ट से बड़ा है, तो आप गलत हैं।” फिल्म उद्योग के भीतर यह बहस अब तेज हो चुकी है कि अगर बॉलीवुड को टिकाऊ बनाना है, तो सितारों की चमक से ज्यादा कहानी और संतुलित बजट पर भरोसा करना होगा।
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