बॉबी देओल स्टारर बंदर का पोस्टर... / courtesy photo
कभी घुंघराले बालों, सपनीली आंखों और डिंपल वाली मुस्कान के चहेते बॉबी देओल ने अपनी कहानी खुद लिखी है। एक आकर्षक रोमांटिक हीरो से एक खूंखार, ताकतवर विलेन में बदलकर। हाल ही में, उन्हें रणवीर सिंह के साथ एक हाई-वोल्टेज विज्ञापन में स्क्रीन शेयर करते देखा गया, जिससे सबको याद दिलाया कि बॉबी देओल 2.0 पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, तेज और अजेय हैं। जैसे-जैसे वह एक बार फिर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, आइए उस शख्स पर करीब से नजर डालें जो गिरा, लड़ा और फिर से खुद को पाया।
शानदार डेब्यू: वो लड़का जिसके पास सब कुछ था
बॉलीवुड के शाही परिवार में जन्मे बॉबी देओल का भाग्य ही था कि वो सुर्खियों में रहें। अभिनय सिर्फ एक विकल्प नहीं था, यह उनके खून में था। जब उन्होंने 1995 में बरसात से डेब्यू किया, तो उम्मीदें आसमान छू रही थीं। उनमें अपने पिता धर्मेंद्र की सादगी और भाई सनी की बेबाक तीव्रता थी। स्टारडम के लिए एकदम सही मेल।
'बरसात' हिट हुई और बॉबी को अगला बड़ा सितारा माना जाने लगा। इसके बाद गुप्त (1997), सोल्जर (1998), बादल (2000), बिच्छू (2000), अजनबी (2001) और हमराज (2002) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में आईं। वे एक आदर्श एक्शन-रोमांटिक हीरो थे - स्मार्ट, स्टाइलिश और आत्मविश्वासी। अपनी डिंपल वाली मुस्कान और सहज अदाओं के साथ बॉबी देओल कूलनेस के प्रतीक बन गए थे। लेकिन बॉलीवुड की याददाश्त बहुत कमजोर है। जिस इंडस्ट्री ने आपको सफलता दिलाई, वही आपको उतनी ही जल्दी भुला भी सकती है।
पतन: चकाचौंध से परछाईं तक
2000 के दशक के मध्य तक, बॉबी का सितारा फीका पड़ने लगा था। नए अभिनेताओं ने उनकी जगह ले ली, जो शहरी कहानियों और आधुनिक सोच के साथ एक्शन-रोमांस के पुराने ढर्रे को पीछे छोड़ गए। हमराज, चोर मचाए शोर, किस्मत, बर्दाश्त, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो और टैंगो चार्ली जैसी फिल्में आईं और बिना किसी हलचल के चली गईं।
फिर भी बॉबी ने झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने हमको तुमसे प्यार है (2005), शाकालाका बूम बूम, झूम बराबर झूम, अपने और नसीब (2007) के साथ इसे जारी रखा। यहां तक कि यमला पगला दीवाना (2011) - एक होम प्रोडक्शन, जिसने देओल तिकड़ी को फिर से एकजुट किया, भी भीड़ नहीं खींच सकी। इसके बाद पोस्टर बॉयज (2017), रेस 3 (2018), यमला पगला दीवाना फिर से (2018), और हाउसफुल 4 (2019) आईं, लेकिन किसी ने अपेक्षित जादू नहीं दिखाया।
बॉबी याद करते हैं- मुझे वो काम नहीं मिल रहा था जो मैं चाहता था। बॉबी ने बेबाकी से याद करते हुए कहा कि मुझे अब कुछ भी रोमांचक नहीं लग रहा था। मुझे कई प्रस्ताव ठुकराने पड़े। बदलाव तो निरंतर चलता रहता है या तो आप खुद को ढाल लें या फिर खत्म हो जाएं। मुझे ये बात बहुत देर से समझ आई।
जब अंधेरा छा गया
फोन बजना बंद हो गया। प्रस्ताव आने बंद हो गए। जिस अभिनेता के कदमों में कभी दुनिया थी, उसने व्यक्तिगत और पेशेवर तौर पर खुद को खोता हुआ पाया। बॉबी ने शराब का सहारा लिया, और उसके बाद उथल-पुथल और अलगाव का दौर शुरू हुआ। उनका परिवार बेबस होकर उन्हें इस हालत में गिरते हुए देखता रहा। बॉबी के बड़े भाई सनी देओल, जो उनकी बहुत परवाह करते थे, बॉबी के फिल्मों से गायब होने के बारे में पूछे जाने पर भावुक होकर रो पड़े। देओल परिवार, जो कभी हंसी और रोशनी से भरा रहता था, अब अनिश्चितता के साये में डूब गया था। और फिर, जैसा कि हर अच्छी बॉलीवुड कहानी में होता है, एक मोड़ आया और एक उद्धारक मिला।
सलमान खान की एंट्री
सलमान ने बॉबी को 'रेस 3' (2018) के लिए चुना और उन्हें जिम जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बॉबी से कहा- तुम्हें फिर से फिट होना होगा। इसके बाद जो बदलाव हुआ, उसने सबको चौंका दिया। बॉबी ने शराब पीना छोड़ दिया, जमकर कसरत की और गठीले शरीर के साथ उभरे। दुनिया का सामना करने के लिए फिर से तैयार।
बॉलीवुड का फीनिक्स
कभी एक और डूबते सितारे के रूप में खारिज किए गए बॉबी देओल राख से उठकर बॉलीवुड के सबसे दिलचस्प कलाकारों में से एक बन गए हैं। उनकी कहानी दूसरे मौके, आत्म-खोज और अटूट लगन की कहानी है। 'बरसात' से लेकर 'आश्रम' तक, दिल टूटने से लेकर सुर्खियों तक, बॉबी का सफर इस बात का सबूत है कि प्रतिभा, जब दृढ़ता के साथ मिलती है, तो हमेशा वापसी का रास्ता खोज लेती है। और इस बार बॉबी देओल सिर्फ वापस नहीं आए हैं... वे टिकने और धूम मचाने के लिए आए हैं।
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