एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा / instagram
बॉलीवुड में अपनी मुस्कान, शानदार फिटनेस और करिश्माई अंदाज से करोड़ों फैंस का दिल जीतने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा ने हमेशा ही अलग तरह की भूमिकाओं में खुद को परखने की कोशिश की है। हालांकि, वह ज्यादातर फिल्मों में हीरो की भूमिका निभाते आए हैं, लेकिन अभिनेता खुद को मोगैंबो और शाकाल जैसे किरदारों में देखना चाहते हैं।
सिद्धार्थ का जन्म 16 जनवरी 1985 को दिल्ली में एक पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता सुनील मल्होत्रा मर्चेंट नेवी में थे और मां रीमा गृहिणी हैं। सिद्धार्थ बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे रहे, लेकिन उनका झुकाव एक्टिंग और मॉडलिंग के प्रति अधिक रहा। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। इस सफर ने उन्हें पहचान और अनुभव दोनों दिए।
सिद्धार्थ ने मॉडलिंग के दौरान कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और नाम कमाया। चार साल तक मॉडलिंग करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में खुद को आजमाया। अभिनय के शुरुआती करियर में उन्होंने कई ऑडिशन दिए और टीवी सीरियल 'धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान' में जयचंद का किरदार निभाया। हालांकि, यह सफर आसान नहीं था। कई फिल्मों के लिए उन्हें लीड रोल मिला, लेकिन प्रोजेक्ट बंद हो जाने के कारण वे बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाए।
सिद्धार्थ की जिंदगी में बड़ा मोड़ आया, जब उन्होंने करण जौहर की फिल्म 'माय नेम इज खान' में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के सुझाव पर करण जौहर ने उन्हें यह मौका दिया। इसी सेट पर उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। दो साल बाद 2012 में उन्होंने 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' से एक्टिंग में डेब्यू किया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और सिद्धार्थ को फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू मेल कैटेगरी में नॉमिनेशन भी मिला।
इसके बाद उनके करियर में कई फिल्में आईं। 'हसीं तो फंसी', 'एक विलेन', 'कपूर एंड संस', और 'शेरशाह' जैसी फिल्मों ने सिद्धार्थ को दमदार अभिनेता के रूप में स्थापित किया। खासतौर पर फिल्म 'एक विलेन' में उनके किरदार ने साबित कर दिखाया कि सिद्धार्थ हीरो के अलावा मजबूत विलेन की भूमिका निभाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने खुद भी कई इंटरव्यू में कहा कि अगर उन्हें मोगैंबो और शाकाल जैसे खतरनाक विलेन का किरदार निभाने का मौका मिले तो वे इसे खुशी-खुशी करेंगे।
सिद्धार्थ हमेशा फिल्मों के चयन सोच-विचार के साथ करते हैं। उनका मानना है कि हर किरदार में अपना योगदान देना और दर्शकों को खुश करना सबसे जरूरी है। इस नजरिए से अगर वह विलेन का किरदार निभाते हैं तो वह उसे सिर्फ डरावना या खतरनाक नहीं, बल्कि दर्शकों को याद रहने वाला बनाना चाहेंगे।
न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login