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बयान पर बवाल

अगर ममदानी किंग की यात्रा के दौरान उन्हे अपने विचार से उनको अवगत नहीं करा सके हैं तो अब या भविष्य में कभी भी ऐसा कर सकते हैं। तब शायद मेजबान या मेहमान की मर्यादा भी आड़े नहीं आएगी और वे खुलकर अपनी बात भी कह सकेंगे।

  29 अप्रैल, 2026 को न्यूयॉर्क की अपनी यात्रा के दौरान, ब्रिटेन के राजा चार्ल्स ने शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी से मुलाकात की। पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग दाईं ओर हैं। 29 अप्रैल, 2026 को न्यूयॉर्क की अपनी यात्रा के दौरान, ब्रिटेन के राजा चार्ल्स ने शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी से मुलाकात की। पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग दाईं ओर हैं। / IANS

कुछ ही दिन पहले किंग चार्ल्स की अमेरिका यात्रा ने मीडिया में प्रत्याशित रूप से खासी सुर्खियां बटोरीं। ब्रिटेन के राजा चार्ल्स और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के साथ ही इस यात्रा ने न्यू यॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के कथनों के कारण भी देश-दुनिया के साथ ही भारत के मीडिया में भी अच्छी-खासी जगह पाई। चार्ल्स की यात्रा के दौरान एक समारोह में उनकी ममदानी से मुलाकात होने वाली थी। इस मुलाकात से ठीक पहले ममदानी ने कहा कि जब वे चार्ल्स से मिलेंगे तो कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने के लिए कहेंगे। खैर, मुलाकात हुई। ममदानी और चार्ल्स मिले भी लेकिन उनमें क्या बात हुई यह पूरी तरह पता न चल सकी लेकिन यह अंदाजा हो गया कि कोहिनूर को लेकर जो ऐलान ममदानी ने किया था वैसा कुछ नहीं हुआ। 

अलबत्ता ममदानी के ही एक कथन से यह साफ हुआ कि वे किंग से अपने 'मन की बात' न कह सके। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि उस यात्रा के दौरान ममदानी शाही मेहमानों से अशिष्टता से पेश आए। 'मेजबान' होने के बावजूद किंग को तवज्जो न देने को लेकर भी ममदानी की आलोचना हुई। अलबत्ता बाद में मेयर की ओर से मलाल जताते हुए यह कहा गया कि अगर वे चार्ल्स से अलग से मिलते तो कोहिनूर भारत को लौटाने के लिए कहते। जोहरान के इस प्रकरण को भारत के चंद टिप्पणीकार या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली जमात ने अपने मूल के प्रति आकर्षण या हिंद प्रेम से जोड़कर देखा तो किसी ने तरजीह नहीं दी।      

बहरहाल, चर्चाएं ऐसी भी रहीं कि अगर ममदानी को भारत से इतना ही प्रेम है या उनको उपनिवेशवाद का विरोध ही करना था और कोहिनूर लौटाने को कहना था तो उसके लिए किसी और अवसर की तलाश करनी थी। जो अवसर उन्होंने अपना विचार रखने के लिए चुना उसे मेजबान की मर्यादा की खिलाफ बताया जा रहा है। भले ममदानी कोहिनूर को उपनिवेदशादी लूट का प्रतीक मानते और कहते हैं लेकिन क्या यह विचार अलग से नहीं रखा जाना चाहिए था। न कि उस समय जब कोई आपका मेहमान है। वैसे अगर ममदानी किंग की यात्रा के दौरान उन्हे अपने विचार से उनको अवगत नहीं करा सके हैं तो अब या भविष्य में कभी भी ऐसा कर सकते हैं। तब शायद मेजबान या मेहमान की मर्यादा भी आड़े नहीं आएगी और वे खुलकर अपनी बात भी कह सकेंगे।

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