प्रतीकात्मक तस्वीर / Courtesy: AI-generated
अमेरिका में एटीएम मशीनों को निशाना बनाने वाली एक खतरनाक आपराधिक लहर तेजी से फैल रही है, जिसे संघीय अधिकारी "एटीएम जैकपॉटिंग" कह रहे हैं। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने इस संबंध में देशव्यापी अलर्ट जारी किया है, क्योंकि इस धोखाधड़ी के कारण वित्तीय संस्थानों को होने वाला नुकसान लगातार बढ़ रहा है। केवल साल 2025 में ही बैंकों को 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का घाटा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक लगभग 1,900 ऐसी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से अकेले पिछले साल 700 मामले सामने आए थे।
एटीएम 'जैकपॉटिंग' क्या है और यह कैसे काम करता है?
पारंपरिक कार्ड स्किमिंग या फिशिंग घोटालों के विपरीत, जैकपॉटिंग ग्राहकों को नहीं बल्कि सीधे एटीएम मशीन को ही निशाना बनाता है। इस प्रक्रिया में अपराधी मशीन तक भौतिक पहुंच बनाते हैं और कभी-कभी सामान्य चाबियों का उपयोग करके उसका कैबिनेट खोल लेते हैं। इसके बाद वे मशीन के अंदर एक खतरनाक सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) इंस्टॉल कर देते हैं। न्याय विभाग (DOJ) के अनुसार, हाल के वर्षों में इस प्रकार के हमलों से होने वाला कुल नुकसान 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है।
इस अपराध का मुख्य हथियार 'प्लौटस' (Ploutus) नामक एक परिष्कृत मैलवेयर है, जिसे पहली बार 2013 में खोजा गया था। यह सॉफ्टवेयर एटीएम के उस हिस्से पर हमला करता है जो हार्डवेयर को नियंत्रित करता है, जिससे अपराधी मशीन को बिना किसी वैध ट्रांजेक्शन के नकदी निकालने का आदेश दे सकते हैं। एक बार संक्रमित होने के बाद, एटीएम मशीन मिनटों में खाली की जा सकती है। इसके कुछ उन्नत संस्करणों में अपराधी बाहरी कीबोर्ड कनेक्ट करके या टेक्स्ट कमांड भेजकर मशीन से पैसा निकलवा सकते हैं। एक सफल जैकपॉटिंग प्रयास से बैंक को प्रति मशीन 100,000 डॉलर से अधिक का नुकसान हो सकता है।
कानूनी कार्रवाई और ग्राहकों के लिए सुरक्षा उपाय
संघीय अभियोजकों ने जैकपॉटिंग साजिशों से जुड़े 93 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए हैं, जिनमें संगठित आपराधिक समूहों के साथ उनके संबंध होने का दावा किया गया है। ये अपराधी अक्सर एक शहर से दूसरे शहर बहुत तेजी से घूमते हैं और एक साथ कई एटीएम को निशाना बनाते हैं। कानून प्रवर्तन अधिकारियों का कहना है कि इन अपराधियों को पकड़ने के लिए बैंकों द्वारा त्वरित रिपोर्टिंग अनिवार्य है ताकि मशीनों को और नुकसान होने से पहले ही बंद किया जा सके।
हालांकि इस तरह की चोरी में आमतौर पर ग्राहकों के पैसे का सीधा नुकसान नहीं होता और बैंक उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराते, लेकिन इससे सेवाएं बाधित होती हैं और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षा के लिहाज से विशेषज्ञों का सुझाव है कि हमेशा बैंक शाखाओं के भीतर स्थित या अच्छी रोशनी वाले और सीसीटीवी की निगरानी वाले एटीएम का ही उपयोग करें। मशीन का उपयोग करने से पहले उसके पैनल, कार्ड स्लॉट या किसी असामान्य अटैचमेंट की जांच जरूर करें। अपना पिन दर्ज करते समय कीपैड को ढकें और अपने बैंक स्टेटमेंट की नियमित समीक्षा करें ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता चल सके।
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