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भारत का 'टाइम'

अमेरिका में भारतीय और भारतीय अमेरिकियों की विकास-यात्रा अपने आप में शोहरत, मेहनत और तरक्की की कहानी बयां करती है।

(ऊपर बाएं से दाएं) सुंदर पिचाई, ज़ोहरान ममदानी (नीचे से दाएं) किरण मुसुनुरु, नील मोहन और विकास खन्ना / TIME

टाइम पत्रिका ने वर्ष 2026 की दुनिया के प्रभावशाली लोगों की सूची में पांच भारतीय-अमेरिकियों को भी शामिल किया है। सुंदर पिचाई, जोहरान ममदानी किरण मुसुनुरु, नील मोहन और विकास खन्ना इस बार 100 प्रभावशाली लोगों की कतार में हैं। टाइम की 2025 के लिए 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भारतीय प्रतिनिधित्व सीमित रहा। उसमें वर्टेक्स फार्मास्युटिकल्स की सीईओ रेशमा केवलरमानी मुख्य सूची में नामित एकमात्र भारतीय मूल की थीं। अलबत्ता प्रभाव की दृष्टि से वर्ष 2024 कहीं असरदार दिखा जिसमें वैश्विक AI परिदृश्य पर उनके महत्वपूर्ण प्रभाव के लिए भारतीय मूल के 15 व्यक्तियों को शामिल किया गया। अलफाबेट-गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई 2024 में भी दुनिया के प्रभावशाली लोगों में शुमार हुए और इस साल भी उनको असरदार लोगों की जमात में टाइम ने जगह दी है। वैश्विक रूप से अत्यधिक प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका टाइल हर साल दुनिया के प्रभावशाली लोगों की सूची जारी करती है। एक मुख्य सूची के अलावा कुछ क्षेत्रवार सूचियां भी जारी की जाती हैं, जो कि उस पेशा विशेष में अहमियत रखती हैं। 

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लंबे समय से हम देख भी रहे हैं कि टाइम की सूची में भारतीय और भारतीय-अमेरिकी जगह पाते रहे हैं। पेशेवर विस्तार और करिअर की दृष्टि से कई शाखाओं में विभक्त होते आज के दौर में भारतीय और भारतीय अमेरिकियों की प्रभावशीलता लगातार बढ़ रही है इसका प्रमाण टाइम जैसी पत्रिकाएं देती रही हैं। अमेरिका में भारतीय और भारतीय अमेरिकियों की विकास-यात्रा अपने आप में शोहरत, मेहनत और तरक्की की कहानी बयां करती है। आज के अमेरिकी समाज में शायद ही कोई क्षेत्र या पेशा ऐसा हो जहां भारतीयों अथवा भारतीय अमेरिकियों ने अपना परचम न लहराया हो। एक लंबे संघर्ष के बाद शिक्षा, चिकित्सा और व्यावसायिक जगत के अलावा भारतीय मूल के लोगों ने सिसायत की दुनिया में भी नीचे से ऊपर तक अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। खास तौर से स्थानीय स्तर पर होने वाले चुनाव इस बात की गवाही देते हैं कि भारतीय-अमेरिकी लोग 'सपनों की धरती' में असर के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इधर पिछले कुछ समय से कई बार तो ऐसा भी देखने में आया है कि किसी एक सीट पर पहले, दूसरे नंबर पर या कहें कि मुकाबले में भारतीय-अमेरिकी ही होते हैं। आगामी चुनावी मुकाबले भी इस तथ्य का अपवाद नहीं। यानी भारत का 'टाइम' अच्छा चल रहा है।

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