इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अमेरिका के लिंकन मेमोरियल पर जुटे सैकड़ों योग प्रेमी। / IANS
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर इस बार दुनिया अधिक उत्साह के साथ अभ्यासरत दिखी। संयुक्त राष्ट्र की मान्यता के बाद हुए इस 12वें वैश्विक आयोजन में अधिकाधिक और इस बार शायद सर्वाधिक और विस्तारित जन-भागीदारी ने स्पष्ट कर दिया है कि जीवन को स्वस्थ, प्रसन्न और निरोगी रखने वाली यह प्राचीन भारतीय पद्धति अब दुनिया के लगभग हर कोने तक पहुंच गई है और इसे सेहत की प्रामाणिक प्रणाली मानकर दैनिक या सालाना रूप से अपनाने वाले लोगों की संख्या हर आयोजन के साथ बढ़ रही है। इस बार भी पूरी दुनिया में योग दिवस का आयोजन मंदिरों से लेकर खाली पड़े मैदानों, पार्कों, दूतावासों, विश्व बैंक जैसे व्यावसायिक परिसरों और यहां तक कि मंदिर सरीखे धार्मिक स्थानों पर हुआ। ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा स्थित ओल्ड पार्लियामेंट हाउस में बड़ी संख्या में लोग योग कर रहे थे तो फिनलैंड के संसद भवन के पुस्तकालय में हुए आयोजन में कूटनीतिज्ञ, फिनलैंड के अधिकारी व प्रवासी भारतीय शामिल हुए। भारत से लेकर अमेरिका, शंघाई से लेकर बर्लिन, खाड़ी से लेकर नेपाल और जापान से लंका तक दरिया किनारे, झीलों, समंदर के तटों पर पड़ी रेतों और बर्फीले पहाड़ों से लेकर झरनों की पृष्ठभूमि में लोग योग करते दिखे। सबके मन में स्वास्थ्य की चाहत के साथ ही उम्मीद थी इससे समाज, देश और दुनिया में अच्छी स्थितियां होंगी।
जहां तक अच्छी दुनिया का सवाल है तो योग को लेकर यह बात भी गारंटी के साथ आगे बढ़ी है कि योग से न केवल स्वाथ्य लाभ मिलता है इससे चित्त शांत रहता है। संघर्ष, टकराव और युद्धों से जूझती आज की दुनिया को कदाचित शांति की सर्वाधिक आवश्यकता है। तमाम कारणों से तनाव, चिंता और बेचैनी से जूझ रही आज की दुनिया को योग संभवत: इसीलिए रास आ रहा है क्योंकि यह सुकून का सिद्ध फॉर्मूला साबित हो रहा है। यूं तो इस बार की थीम बुजुर्गों की स्वास्थ्य कामना से जुड़ी हुई थी लेकिन दुनिया आज टकराव और अनिश्चितता के जिस दौर से गुजर रही है वहां हर कोई शांति की कामना कर रहा है। हालांकि हर दूसरे दिन इस कामना को 'सियासी' और 'स्वाभिमान' से जुड़े अदृष्य कारणों से ठेस पहुंचती है। योग दिवस पर भारत से प्रधानमंत्री मोदी ने दुनियाभर को स्वस्थ रहने का संदेश दिया और विश्व में शांति का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि योग दुनिया को जोड़ता है और यही इसकी शक्ति है। उम्मीद की जा रही है कि जब दुनिया इसके माध्यम से जुड़ेगी तो परस्पर टकरावों का अंत होगा। और यदि ऐसा हो पाता है तो यह योग की एक बहुत बड़ी देन होगी। अलबत्ता, योग के 'बाजारीकरण' से बचना होगा, जिसके बारे में अब बातें खुलकर होने लगी हैं।
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