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धन प्रेषण और भारत में प्रवाह

विदेशी धन प्राप्तकर्ताओं में जहां भारत अव्वल होने के साथ-साथ अन्य देशों से काफी आगे है, वहीं अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक धन भेजने वाला देश बना हुआ है।

 सांकेतिक चित्र... सांकेतिक चित्र... / Jason Leung / Unsplash

विश्व प्रवासन रिपोर्ट, 2026 के अनुसार भारत ने 2024 में भी विश्व में सबसे अधिक प्रेषण राशि प्राप्त करने वाले देश के रूप में अपनी स्थिति कायम रखी है। उल्लिखित वर्ष के दौरान भारतीयों ने 137 अरब डॉलर से अधिक की राशि प्रेषित की। भारत एक मात्र ऐसा देश है जिसने प्रेषण राशि में 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया है। विदेशी धन प्राप्तकर्ताओं में जहां भारत अव्वल होने के साथ-साथ अन्य देशों से काफी आगे है, वहीं अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक धन भेजने वाला देश बना हुआ है। यह बात उच्च आय वाले देशों के रूप में अमेरिका की शीर्ष स्थिति बयां करती है। 

गौरतलब है कि वर्ष 2010 से ही भारत सबसे अधिक धन प्राप्त करने वाले देशों में शीर्ष पर रहा है। उस साल भारत को 53.48 अरब डॉलर प्राप्त हुए थे। यह प्रेषित राशि बढ़ते हुए 2024 में 137.67 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। प्रेषण राशि का सतत रूप से बढ़ना इस तथ्य को स्पष्ट रूप से रेखांकित कर रहा है कि भारतीय मूल के लोग दुनिया के जिस भी कोने में हैं या पहुंच रहे हैं वे आर्थिक रूप से लगातार समृद्ध होते जा रहे हैं।

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संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट अमेरिका में बसे या यहां काम कर रहे भारतीयों की हैसियत का आईना भी मानी जा सकती है। जाहिर है कि अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक रूप से यहां मजबूत हो रहे हैं, इसीलिए वे न केवल पैसा भेज पा रहे हैं बल्कि प्रेषण का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। यूं भी हम देख रहे हैं कि अमेरिका में अब भारतीयों की आबादी 50 लाख पार कर चुकी है। इस आबादी का एक हिस्सा अमेरिका के शिक्षा, व्यापार और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में शीर्ष स्तर पर अपनी जगह बना रहा है। अमेरिका के राजनीतिक संसार में भी भारतीयों की नुमाइंदगी लगातार विस्तार पा रही है। 

लिहाजा, सहज ही समझा जा सकता है कि जिस मुल्क की आबादी का प्रतिशत जहां अधिक होगा वहां से धन प्रेषण भी वैसा ही होगा। इस लिहाज से एक देश के रूप में अमेरिका बड़ी संख्या में भारतीय का ठिकाना है। भारतीयों की मजबूत आर्थिक स्थिति इस बात की भी गवाह है कि वे 'अपनाई हुई धरती' के सामाजिक, राजनैतिक और पेशेवर ताने-बाने में रच-बस रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट जहां अमेरिका को 'सपने साकार करने वाले मुल्क' के रूप में प्रतिष्ठित करती है तो भारतीयों की संघर्षशीलता को भी स्थापित करती है।

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