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पानी पर टिकी आग

आग में घी का काम बिलावल भुट्टो जैसे गैर जिम्मेदार पाकिस्तानी नेता कर रहे हैं। भुट्टो अमेरिका में जाकर भारत से शांति वार्ता की गुहार लगाते हैं और स्वदेश लौटकर कहते हैं कि इस बार ट्रम्प भी पाकिस्तान को नहीं रोक पाएंगे।

सांकेतिक तस्वीर / GOI

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प को नामित करते हुए एक भारतीय विद्वान डॉ. पंकज फडनिस ने भारत की उस नई डॉक्ट्रीन को खतरनाक बताया है जिसमें दक्षिण एशियाई मुल्क ने ऐलान किया कि भविष्य में अगर कोई आतंकवादी हमला होता है तो वह पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा। डॉ. फडनिस ने इस डॉक्ट्रीन को खतरनाक साबित करने के लिए जो दलील दी है वह किसी को भी आसानी से समझ में आने वाली है। बकौल डॉ.फडनिस यह एक बहुत ही खतरनाक सिद्धांत है। इसका सपाट मतलब है भारतीय उपमहाद्वीप में शांति को कुछ अज्ञात कायरतापूर्ण और संख्यात्मक रूप से बहुत छोटे या अल्पसंख्यक-आतंकवादियों कृत्यों के लिए बंधक बनाना। पहलगाम के मामले में हमला चार आतंकवादियों ने किया था, जो अब भी फरार हैं, मगर उनकी हरकतें परमाणु युद्ध का कारण बन सकती थीं। इस सिद्धांत का अर्थ यह भी है कि आतंकी हमला होते ही भारत जवाब देगा। लेकिन पाकिस्तान तो कश्मीर हमले में संलिप्तता से इनकार करता है। पाकिस्तान इस बात से भी इनकार करता है कि उसकी धरती पर आतंकवादी पलते हैं। हालांकि भारत ने यूएन तक में इस बात के कई बार सुबूत दिये हैं लेकिन पाकिस्तान अपनी वही बात दोहराता रहा है। यह दीगर है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की शरणस्थली है इसका सबसे बड़ा गवाह और पीड़ित स्वयं अमेरिका है क्योंकि 9/11 का मास्टरमाइंड और अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की धरती पर जाकर ही ढेर किया गया। यानी पाकिस्तान इनकार करता रहेगा और भारत हर आतंकी घटना के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराएगा। अगर ऐसे धधकते हालात में कहीं भारत में हमला हो गया तो फिर दोनों ओर से गोल बरसने लगेंगे। क्योंकि यह तो पुष्ट हो ही नहीं पाएगा कि घटना आतंकी थी या नहीं, आतंकी कहां के थे। हालात फिर वहीं जा पहुंचेंगे जो 22 अप्रैल से लेकर 10 मई तक दोनों देशों के बीच थे। परमाणु इस्तेमाल की आशंकाएं भी मंडराएंगी। तो इसका निष्कर्ष यह हुआ कि आग 'पानी' पर टिकी हुई है। पानी बहा और आग भड़की।

कश्मीर घाटी में आतंकियों द्वारा किये गये नरसंहार के जवाब में भारत का ऑपरेशन सिंदूर (जो कि अभी खत्म नहीं हुआ है), उसके बाद दोनों देशों के बीच करीब चार दिनों तक सीमा पर सशस्त्र, हिंसक टकराव, दोनों ओर की जनहानि, कई दिनों तक पूरे दक्षिण एशिया में अशांति, खास तौर से भारत-पाकिस्तान के अवाम में भय और आशंकाओं के बाद 10 मई को जो युद्धविराम हुआ वह बस राहत देने वाला ही दिख रहा है। तब से अब तक दोनों देशों के बीच बस हथियार ही नहीं चल रहे, किंतु वाकयुद्ध जारी है। इसीलिए इस युद्धविराम के बाद भी आशंकाएं खड़ी हैं। दुनिया के दूसरे देश भी इस युद्धविराम को फौरी राहत मान रहे हैं। लेकिन भारत और पाकिस्तान की ओर से भी युद्धविराम की आड़ में उठ रही लपटों को शांत नहीं होने दिया जा रहा। युद्धविराम के बाद दुनिया के 35 देशों में भारत की ओर से सांसदों के जो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल गये उन्होंने देश का रुख तो स्पष्ट किया पर साथ ही यह भी समझाने की कोशिश की कि हिंसक जवाब की नौबत क्यों आई। साथ ही यह भी ऐलान किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत में अपने एक्शन पर गर्व मनाया जा रहा है। वहीं, भारत के हमलों से सहमा-बौराया पाकिस्तान नुकसान की गिनती करते-करते अपने रक्षा बजट को कई गुना बढ़ा चुका है। आग में घी का काम बिलावल भुट्टो जैसे गैर जिम्मेदार पाकिस्तानी नेता कर रहे हैं। भुट्टो अमेरिका में जाकर भारत से शांति वार्ता की गुहार लगाते हैं और स्वदेश लौटकर कहते हैं कि इस बार ट्रम्प भी पाकिस्तान को नहीं रोक पाएंगे।   

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