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सिएटल में भारतीय-अमेरिकी विमर्श, राउंडग्लास इंडिया केंद्र की नई वीडियो सीरीज शुरू

‘द हाइफ़न: भारतीय-अमेरिकी संवाद’ नामक यह श्रृंखला केंद्र की पूर्व वार्ता-श्रृंखला ‘डेज़ी रूट्स एंड रूट्स’ का विस्तार है।

हाइफ़न: भारतीय-अमेरिकी संवाद’ / Roundglass India Center

अमेरिका के सिएटल विश्वविद्यालय स्थित राउंडग्लास इंडिया केंद्र ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक प्रश्नों पर केंद्रित एक नई वीडियो वार्ता-श्रृंखला शुरू की है। ‘द हाइफ़न: भारतीय-अमेरिकी संवाद’ नामक यह श्रृंखला केंद्र की पूर्व वार्ता-श्रृंखला ‘डेज़ी रूट्स एंड रूट्स’ का विस्तार है। नई श्रृंखला में अमेरिका-भारत संबंधों, प्रवासी राजनीति और सीमापार नागरिक जीवन से जुड़े समकालीन विषयों पर विमर्श किया जाएगा।

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सीतल कालंत्रि कर रहीं संचालन
इस वार्ता-श्रृंखला का संचालन केंद्र की संस्थापक निदेशक सीतल कालंत्रि कर रही हैं। इस मंच पर शिक्षाविदों, नीतिगत विशेषज्ञों और सामुदायिक नेताओं को आमंत्रित कर भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद किया जा रहा है। यह समुदाय अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ते और राजनीतिक रूप से सक्रिय प्रवासी समूहों में से एक है।



पहला प्रकरण: क्या भारत के समर्थन में पैरवी की जानी चाहिए?
पहला प्रकरण “क्या भारतीय-अमेरिकियों को भारत की ओर से अमेरिकी सरकार में पैरवी करनी चाहिए?” विषय पर आधारित है। इसमें भारतीय सांसद शशि थरूर द्वारा हाल में व्यक्त उस मत पर चर्चा की गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय को भारत के समर्थन में अमेरिकी सरकार के समक्ष अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

इस संवाद में कालंत्रि के साथ कपिल शर्मा शामिल हैं, जो राउंडग्लास फाउंडेशन के ‘ग्लोबल इंडिया कलेक्टिव’ में वरिष्ठ दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों पर सरकार और विधायी संस्थानों में कार्य करने के अपने अनुभव के आधार पर कहा कि भारतीय-अमेरिकी राजनीतिक सहभागिता किसी एकमात्र दबाव-समूह मॉडल का अनुसरण नहीं कर सकती। यह पहल समावेशी, द्विदलीय और अमेरिका की आंतरिक प्राथमिकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।

चर्चा में भारतीय-अमेरिकी राजनीतिक सक्रियता की तुलना यहूदी-अमेरिकी दबाव-समूह से भी की गई तथा दोनों समुदायों के इतिहास, जनसांख्यिकीय संरचना, संस्थागत ढांचे और आंतरिक एकजुटता के अंतर को रेखांकित किया गया।

दूसरा प्रकरण: भारतीयों के विरुद्ध बढ़ती घृणा पर चर्चा
श्रृंखला का अगला प्रकरण “भारतीय-विरोधी घृणा: यह क्यों और अभी क्यों?” विषय पर केंद्रित होगा। इसमें अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के विरुद्ध बढ़ती घृणा, हिंसा, उत्पीड़न और तोड़फोड़ की घटनाओं का विश्लेषण किया जाएगा।

इस कड़ी में मंजुशा कुलकर्णी भाग लेंगी, जो एएपीआई इक्विटी एलायंस की कार्यकारी निदेशक और स्टॉप एएपीआई हेट की सह-संस्थापक हैं। चर्चा में हालिया घटनाओं के साथ राजनीतिक बयानबाजी और आव्रजन से जुड़ी बहसों की भूमिका पर भी विचार किया जाएगा।

सम्मानित वार्ता-परंपरा का विस्तार
‘द हाइफ़न’ के शुभारंभ के साथ राउंडग्लास इंडिया केंद्र की वार्ता-परंपरा का विस्तार हुआ है। इसकी पूर्व श्रृंखला ‘डेज़ी रूट्स एंड रूट्स’ को वर्ष 2025 में विविधता, समानता और समावेशन श्रेणी में कांस्य सिग्नल सम्मान प्राप्त हुआ था।

राउंडग्लास इंडिया केंद्र समकालीन भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े विषयों पर अध्ययन, संवाद और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्य करता है।

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