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'हमारी विरासत, हमारी पहचान' से HindiUSA सेंट लुईस ने समुदाय को जोड़ा 

HindiUSA सेंट लुइस ने 20 अप्रैल, 2025 को अपने तीसरे सालाना सांस्कृतिक कार्यक्रम, 'हमारी विरासत, हमारी पहचान' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 450 से अधिक मेहमानों ने भाग लिया और भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति का आनंद लिया।

HindiUSA सेंट लुईस ने अपने तीसरे सालाना सांस्कृतिक कार्यक्रम 'हमारी विरासत, हमारी पहचान' का आयोजन बेहद गर्व और उत्साह के साथ किया। / HindiUSA

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नमन करते हुए HindiUSA सेंट लुईस ने अपने तीसरे सालाना सांस्कृतिक कार्यक्रम 'हमारी विरासत, हमारी पहचान' का आयोजन बेहद गर्व और उत्साह के साथ किया। इस भव्य समारोह में 450 से ज्यादा मेहमान, परिवार, विशिष्ट अतिथि और समुदाय के लोग शामिल हुए। सभी ने HindiUSA परिवार के नौजवान बच्चों द्वारा जीवंत किए गए भारत के गौरवशाली इतिहास की रोमांचक यात्रा को देखा और महसूस किया।

ढाई घंटे का ये कार्यक्रम एक रंगीन ऐतिहासिक तस्वीर की तरह सामने आया। शुरुआत चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता से हुई। फिर पृथ्वी राज चौहान, महाराणा प्रताप, तानाजी मालसुरे, छत्रपति शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस की दास्तान सुनाई गई। सावित्रीबाई फुले जैसे सुधारकों के योगदान और महात्मा गांधी के शाश्वत ज्ञान को भी बड़े ही सलीके और गहराई से प्रस्तुत किया गया। भारत के जांबाज सैनिकों को समर्पित एक जोशीली प्रस्तुति ने सभी के रगों में देशभक्ति की लहरें दौड़ा दीं। आखिरी परफॉर्मेंस 'स्पिरिट ऑफ इंडिया' ने तो समा ही बांध दिया। इसे HindiUSA के शिक्षकों ने पेश किया था और दर्शकों पर इसकी गहरी छाप बनी रही।

इस कार्यक्रम को और भी खास बनाया शिकागो में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सामुदायिक मामलों के काउंसिल हेड विनोद गौतम और चेस्टरफील्ड सिटी के काउंसिल सदस्य गैरी बुदूर की मौजूदगी ने। इनकी उपस्थिति ने एक बार फिर साबित किया कि सांस्कृतिक शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है और HindiUSA इस दिशा में समुदाय पर कितना गहरा प्रभाव डाल रहा है।

कार्यक्रम के दौरान एक ऐतिहासिक पल आया जब HindiUSA के पांच छात्रों को सील ऑफ बाइलिटरेसी (द्विभाषीय दक्षता पदक) से सम्मानित किया गया। इनमें से दो छात्रों ने एडवांस्ड सील हासिल किया, जो अपने आप में मिसौरी राज्य के इतिहास में पहली उपलब्धि है। ये एक चमकता उदाहरण है कि जब छात्र, माता-पिता और शिक्षक मिलकर एक साझा लक्ष्य के लिए जुटते हैं, तो हिंदी भाषा को ऊंचाइयों तक ले जाना असंभव नहीं रह जाता।

इस सफल शाम के पीछे 65 से ज्यादा स्वयंसेवकों की दिन-रात मेहनत छिपी थी, जिन्होंने बैकस्टेज सपोर्ट से लेकर रजिस्ट्रेशन, ऑडियो-वीडियो, सजावट और मेहमानों के स्वागत तक हर छोटी-बड़ी चीज का बारीकी से ध्यान रखा। नतीजा ये रहा कि पूरा कार्यक्रम एकदम सहज और अविस्मरणीय बन गया।

आज से सात साल पहले महज 22 छात्रों के साथ मयंक जैन और डॉ. अंशु जैन ने जिस संस्था की नींव रखी थी, वो अब मिडवेस्ट क्षेत्र का सबसे बड़ा गैर-सरकारी, स्वयंसेवकों द्वारा संचालित हिंदी भाषा स्कूल बन चुका है। HindiUSA सेंट लुईस निरंतर एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। जो गर्व, पहचान और जड़ों से जुड़ाव को एक-एक बच्चे, एक-एक परिवार और एक-एक प्रस्तुति के जरिए सहेज रहा है।

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