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ग्रोथ के मामले में भारत अव्वल, मगर रोजगार के मोर्चे पर कमजोर

जॉब फॉर रेजिलिएंस रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दक्षिण एशियाई क्षेत्र की GDP ग्रोथ अनुमानित 6 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसमें भारत का योगदान सबसे अधिक होगा।

भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। / image : wikipedia

भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और निकट भविष्य में भी बनी रहेगी। भारत न सिर्फ अपनी बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के विकास को भी गति दे रहा है। 

जॉब फॉर रेजिलिएंस रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दक्षिण एशियाई क्षेत्र की GDP ग्रोथ अनुमानित 6 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसमें भारत का योगदान सबसे अधिक होगा। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में जीडीपी ग्रोथ हालांकि तेजी से बढ़ी है लेकिन बाहरी कारकों की वजह से बेरोजगारी और जलवायु अस्थिरता जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। 

भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके बावजूद भारत लंबे समय से विकास का फायदों के असमान वितरण की समस्या से जूझ रहा है। विश्व बैंक के विश्लेषण से पता चला है कि 2024 में क्षेत्र की 6% ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन यह वृद्धि ज्यादा समय तक नहीं रहेगी।



पश्चिमी देशों में जहां औद्योगिकीकरण की वजह से रोजगार बढ़े, दक्षिण एशियाई देशों को जीडीपी ग्रोथ और नए रोजगार के बीच महत्वपूर्ण अंतर का सामना करना पड़ा। अग्रणी अर्थशास्त्रियों ने भी जीडीपी विकास की धारणा और आर्थिक स्वास्थ्य के वास्तविक संकेतकों के बीच असमानता पर जोर दिया है। 

भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) जैसे विकास के व्यापक उपायों की वकालत करते हैं। वहीं नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी की 'पूअर इकोनोमिक्स' रिपोर्ट भारत में लगातार बनी हुई असमानता को उजागर करती है।

भारत और पूरे दक्षिण एशिया में हालांकि मौजूदा जीडीपी ग्रोथ कोरोना महामारी से पूर्व के स्तर से नीचे रही है। गौर करने की बात ये है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 80% बेरोजगार युवा हैं, जिनकी भारतीय वर्कफोर्स में बहुसंख्यक आबादी है।

भारत में सार्वजनिक खर्च में वृद्धि के कारण जीडीपी ग्रोथ बढी है लेकिन संरचनात्मक समस्याएं अब भी कायम हैं। अस्थिर विकास पैटर्न के लिए कमजोर राजकोषीय नीति को जिम्मेदार माना गया है। यह हरित क्रांति के दौरान ग्रामीण अभिजात वर्ग के निर्माण और सार्वजनिक निवेश पर बैंक राष्ट्रीयकरण का अपर्याप्त प्रभाव जैसी पिछली नाकामियों की याद दिलाता है।

रिपोर्ट ने वर्कफोर्स में महिलाओं की कम भागीदारी की तरफ भी इशारा किया है। 2000 के दशक से कार्यबल में पुरुष भागीदारी में गिरावट आई है। वहीं अनौपचारिक क्षेत्र की नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। इसके बावजूद दक्षिण एशिया में महिला कार्यबल की भागीदारी विश्व स्तर पर सबसे कम रही। 

भारत ने 2021-22 में 9.7%, 2022-23 में 7% और 2023-24 में 7.5% की ग्रोथ हासिल की थी। 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटकर 6.5% रहने का अनुमान है। माना जा रहा है कि सर्विस और उद्योग क्षेत्र का योगदान सबसे ज्यादा रहेगा। 

इस मामले में भारत के आर्थिक प्रभुत्व के बावजूद पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव और भूटान जैसे अन्य देशों ने एचडीआई मेट्रिक्स में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है, जो समावेशी विकास रणनीतियों की जरूरत को दिखाता है। 

 

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