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रुपये में गिरावट वैश्विक दबाव का नतीजा: भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार

पिछले कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट देखी गई है। गुरुवार को यह 0.12 पैसे कम होकर 91.94 पर आ गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कमजोरी अन्य उभरते बाजार की मुद्राओं में कमजोरी के अनुरूप ही है, जो समान भू-राजनीतिक जोखिमों से गुजर रही हैं। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किए जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाचार एजेंसी आईएएनएस के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए नागेश्वरन ने कहा कि अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूती और स्थिरता प्रदर्शित करते रहेंगे, इसलिए निवेशक आने वाले समय में भारतीय मुद्रा के प्रति अपने रुख का पुनर्मूल्यांकन करेंगे।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने आगे कहा, "अगर हम केंद्र और राज्य सरकारों दोनों स्तरों पर पिछले 12 से 18 महीनों में किए गए संरचनात्मक सुधारों के पथ पर चलते रहें और भारतीय निर्यात में वृद्धि जारी रहे, तो इससे आगे चलकर भारतीय रुपए के बारे में संशोधित धारणाओं को और मजबूती मिलेगी।"

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नागेश्वरन ने कहा, "छोटी अवधि में कुछ घटनाक्रम हमारे नियंत्रण में नहीं हो सकते हैं, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि रुपए का मैक्रो-फंडामेंटल्स को प्रतिबिंबित न करना है, लेकिन निरंतर विकास दर निश्चित रूप से निवेशकों का ध्यान आकर्षित करेगी और तभी स्थिति में बदलाव आएगा।"

पिछले कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट देखी गई है। गुरुवार को यह 0.12 पैसे कम होकर 91.94 पर आ गया है। डॉलर के मुकाबले रुपए में दबाव बढ़ने की वजह सोने का महंगा होना भी है, जिससे देश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है।

इसके अलावा, नागेश्वरन ने कहा कि मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश की आर्थिक विकास दर को 7.5 प्रतिशत से लेकर 8 प्रतिशत तक ले जा सकता है, जो कि आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए औसत विकास दर अनुमान 7 प्रतिशत से अधिक है।

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