भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मलहोत्रा / The Consulate General of India, New York
न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने 20 अप्रैल 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मलहोत्रा के साथ एक विशेष राउंड-टेबल इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया।
यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क स्थित वाणिज्य दूतावास में हुआ जिसमें वित्तीय संस्थानों, निवेश कंपनियों और नीति क्षेत्र से जुड़े 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें बैंक, एसेट मैनेजमेंट फर्म, फैमिली ऑफिस, कैपिटल मैनेजमेंट कंपनियां, संस्थागत निवेशक और वेल्थ मैनेजर शामिल थे जो वित्तीय समुदाय की मजबूत रुचि को दर्शाता है।
चर्चा का केंद्र भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति और वित्तीय बाजार रहे। अधिकारियों ने प्रमुख संकेतकों पर प्रकाश डाला जिनमें मुद्रास्फीति का लक्ष्य सीमा में रहना, सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.1 प्रतिशत के बराबर चालू खाता घाटा और लगभग 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार शामिल है जो करीब 11 महीनों के आयात को कवर करता है। भारत की राजकोषीय नीति को भी संतुलित और सावधानीपूर्ण बताया गया।
प्रतिभागियों को भारत के वित्तीय बाजारों - इक्विटी और बॉन्ड सेगमेंट में विकास और गहराई के बारे में जानकारी दी गई जिसमें सरकारी और कॉरपोरेट ऋण शामिल हैं। सत्र में बाजार ढांचे से जुड़े विकास जैसे इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, केंद्रीकृत क्लियरिंग सिस्टम और नियामकीय पारदर्शिता पर भी चर्चा हुई।
मल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता और सुव्यवस्थित बाजार स्थितियों के प्रति केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने नियामकीय ढांचे को सरल बनाने, कारोबार करने में आसानी बढ़ाने, विदेशी निवेशकों की पहुंच विस्तार करने और घरेलू तथा वैश्विक बाजारों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव, जैसे शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में कमी और विनिमय दर में बदलाव, चक्रीय होते हैं और इन्हें दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के तहत देखा जा रहा है।
सत्र के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की मुख्य महाप्रबंधक डिंपल भंडिया ने 'भारत का आर्थिक परिदृश्य' विषय पर प्रस्तुति दी। इसमें व्यापक आर्थिक आधार, वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और नीति ढांचे की स्थिरता को रेखांकित किया गया। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
सत्र का समापन प्रश्न-उत्तर सत्र के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने विदेशी निवेश के रुझान, मुद्रा प्रबंधन, भुगतान संतुलन, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और बाजार तरलता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए।
मल्होत्रा ने इन सवालों के जवाब दिए और नीतिगत दिशा को स्पष्ट किया। यह चर्चा नीति निर्माताओं और वैश्विक निवेशकों के बीच लगातार संवाद को दर्शाती है, जहां प्रतिभागियों ने भारत की आर्थिक स्थिति, सुधार प्रयासों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका पर ध्यान दिया।
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