ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

भारत इस सप्ताह दे देगा व्यापार समझौते को अंतिम रूप

फाइनेंशियल टाइम्स ने मंगलवार को इस वार्ता के बारे में जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से रिपोर्ट दी है।

सांकेतिक तस्वीर / X image

भारत इसी सप्ताह अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे देगा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है। इससे पहले रॉयटर्स ने समझौता जल्द होने का संकेत दिया था।  

सूत्रों के मुताबिक भारत इस सप्ताह के शुरू में ही अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे देगा। फाइनेंशियल टाइम्स ने मंगलवार को इस वार्ता के बारे में जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से रिपोर्ट दी है।

अंतिम रूप देने में जुटे भारतीय अधिकारी
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक भारतीय अधिकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से 9 जुलाई की डेडलाइन तय किए जाने के बाद, भारतीय अधिकारी वॉशिंगटन में अपनी यात्रा बढ़ा रहे हैं ताकि बची हुई आपत्तियों पर अंतिम सहमति बनाई जा सके। दो वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने 30 जून को यह जानकारी दी।

बताया गया है कि कार ऑटो कंपोनेंट्स, स्टील और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को लेकर अभी भी दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। पहले भारतीय प्रतिनिधिमंडल को 27 जून तक चर्चा समाप्त कर वापस लौटना था। 

एक अधिकारी के मुताबिक भारत ने 90% टैरिफ लाइनों पर रियायत देने की पेशकश की है, लेकिन कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर कुछ आपत्तियां बनी हुई हैं। अब अंतिम निर्णय दोनों देशों की राजनीतिक नेतृत्व को लेना है।

दूसरे अधिकारी ने बताया कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है, तो प्रतिनिधिमंडल कुछ दिन और रुक सकता है। इस बीच, भारत के वाणिज्य मंत्रालय और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 जून को एक इंटरव्यू में कहा कि कृषि और डेयरी हमारे लिए बहुत ही संवेदनशील मुद्दे हैं। मैं चाहती हूँ कि एक बड़ा, अच्छा, सुंदर समझौता हो। जल्द नतीजा निकलना भारत के हित में है।

वहीं ट्रम्प ने पिछले सप्ताह बयान दिया था कि अमेरिका और भारत के बीच 'बहुत बड़ा' व्यापार समझौता होने जा रहा है, लेकिन उन्होंने इसके विवरण साझा नहीं किए। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत और अमेरिका ट्रम्प की डेडलाइन से पहले एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर मुहर लगा पाएंगे या नहीं।
 

Comments

Related