प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS
अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे आयात शुल्क से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत अपने निर्यात बाजारों को विविध बनाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर के अंत में महज नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा करना इसी दिशा में नई दिल्ली के स्पष्ट इरादों का संकेत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले वर्ष भारत पर 50 प्रतिशत का दंडात्मक आयात शुल्क लगाए जाने के बाद से भारत ने इन टैरिफों के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखा है, हालांकि बातचीत के दरवाजे अब भी खुले रखे गए हैं।
लेख के अनुसार, न्यूजीलैंड के साथ हुआ व्यापार समझौता हाल के महीनों में तीसरा अहम करार है, जो इससे पहले यूनाइटेड किंगडम और ओमान के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों के तुरंत बाद सामने आया।
अमेरिका फिलहाल भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां देश के कुल वस्तु निर्यात का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा जाता है। इसमें परिधान, चमड़ा उत्पाद जैसे सामान शामिल हैं, जिन्हें वहां मौजूद बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय तेजी से अपनाता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने पर नई दिल्ली के सख्त रुख के चलते दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते की संभावनाएं अभी स्पष्ट नहीं हैं। विशेषज्ञों को इस बात पर भी संदेह है कि वाशिंगटन अपने लगाए गए टैरिफों में कोई बड़ा रोलबैक करेगा।
इसके बावजूद, लेख में रेखांकित किया गया है कि भारत केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता और ट्रंप प्रशासन की नीतियों से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी कहा है कि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और क्षेत्रों में व्यापार विविधीकरण के भारत के प्रयास रंग ला रहे हैं और निर्यात में सकारात्मक गति बनी हुई है, जो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत के निर्यात ने मजबूती और लचीलापन दिखाया। वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात रिकॉर्ड 825.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष में भी यह रुझान जारी है और अप्रैल से नवंबर की अवधि में निर्यात 5.43 प्रतिशत बढ़कर 562.13 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
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