भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच सोमवार से नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सातवें दौर की बातचीत शुरू हो गई है। / Luke Southern
यूरोपीय संघ (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत भारत यूरोपीय गाड़ियों पर आयात शुल्क कम करके 40 प्रतिशत करने की तैयारी कर रहा है, जो कि फिलहाल 110 प्रतिशत तक है। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई।
रिपोर्ट्स में आगे बताया गया कि एफटीए में 15,000 यूरो (भारतीय रुपयों में करीब 16.3 लाख रुपए) से अधिक की कारों पर यह नया शुल्क लागू होगा। इसको आने वाले वर्षों में 10 प्रतिशत तक किए जाने की संभावना है। हालांकि, इस एफटीए में भी ब्रिटेन से हुए एफटीए की तरह की पूरी तरह से निर्मित गाड़ी भारत में आयात करने की एक सीमा होगी।
सूत्रों ने बताया कि भारत ने यूरोप से सालाना 2 लाख ईंधन वाली गाड़ियां आयात करने के लिए सहमत हुआ है। हालांकि, एफटीए सामने आने के बाद इसमें बदलाव संभव है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरुआती पांच वर्षों में इसका फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि सरकार घरेलू कंपनियों की ओर से किए गए निवेश की रक्षा करना चाहती है।
भारत वर्तमान में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन यह सबसे अधिक संरक्षित बाजारों में से एक बना हुआ है। भारत में पूरी तरह से निर्मित कारों पर आयात शुल्क 70 प्रतिशत से 110 प्रतिशत तक है, इस नीति की कई वैश्विक ऑटो कंपनियों ने आलोचना भी की है।
आयात करों में कमी से यूरोपीय कार निर्माताओं को भारत में अपने आयातित मॉडलों की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी रखने में मदद मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इससे उन्हें स्थानीय विनिर्माण निवेश पर निर्णय लेने से पहले भारतीय बाजार में नए वाहनों का परीक्षण करने में भी मदद मिलेगी।
प्रस्तावित शुल्क कटौती ऐसे समय में हो रही है जब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। यूरोपीय नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर स्तरीय वार्ता करने की संभावना है।
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