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भारत में GST काउंसिल की बैठक: केंद्र और राज्यों में नई बहस

जीएसटी ने राज्यों के बीच विजेता और हारे हुए राज्यों का अंतर पैदा कर दिया है और अब राजनीतिक दांव आर्थिक दांव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

 जीएसटी प्रतीकात्मक तस्वीर। जीएसटी प्रतीकात्मक तस्वीर। / iStock

भारत के केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 3 और 4 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक का मुख्य एजेंडा टैक्स सुधार, दरों में समायोजन और अनुपालन सुधार होगा। लेकिन इसके पीछे वास्तविकता और भी जटिल है। जीएसटी ने राज्यों के बीच विजेता और हारे हुए राज्यों का अंतर पैदा कर दिया है और अब राजनीतिक दांव आर्थिक दांव से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

राज्यों में असमान प्रदर्शन
राष्ट्रीय लोक वित्त और नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के अध्ययन के अनुसार, जीएसटी लागू होने के आठ वर्षों में अधिकांश राज्यों ने 2015-16 के आधार वर्ष में मिलने वाली अपनी राजस्व हिस्सेदारी बनाए रखने में असफलता पाई है। केंद्र से मिलने वाले मुआवजे ने जून 2022 तक इस समस्या को छिपाया, लेकिन उसके समाप्त होने के बाद कुछ राज्य संरचनात्मक कमी का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ अपेक्षाकृत सुरक्षित बने हुए हैं।

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महाराष्ट्र ने लाभ उठाया, एसजीएसटी और जीएसडीपी अनुपात 3.08% से बढ़कर औसतन 3.17% हो गया। उत्तर प्रदेश लगभग स्थिर रहा, औसत 2.83% रहा। बिहार का अनुपात घटकर 3.01% हो गया, जबकि हरियाणा और पंजाब ने मुआवजे से राजस्व संरक्षित किया। 
 

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