VOSAP के संस्थापक प्रणव देसाई की हालिया भारत यात्रा बेहद सार्थक और प्रभावशाली रही। उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और कई जगहों का दौरा किया। इन सभी गतिविधियों का मूल विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन से मेल खाता है, जिसमें सभी भारतीयों के लिए समावेशिता और सुगमता सुनिश्चित की जाए। प्रणव देसाई ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए विजन 2020 से विजन 2047: पिछले 10 वर्षों में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी यात्रा को मेरी हालिया भारत यात्रा के दौरान जबरदस्त समर्थन मिला।
VOSAP के फाउंडर प्रणव देसाई ने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की और 'विजन 2047 फॉर दिव्यांगजन' पर बातचीत हुई। इसमें 2047 तक दिव्यांगता से जुड़े कामों में 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने का लक्ष्य है। पीएम मोदी को ये आइडिया बहुत पसंद आया और उनके ऑफिस ने तुरंत एक्शन प्लान बनाना शुरू कर दिया। देसाई ने बताया कि ये मुलाकात उनके काम में एक बहुत बड़ा मुकाम है। 2014 से वो 'विजन 2020', 'असेसिबल इंडिया कैंपेन' और अब 'विजन 2047' पर काम कर रहे हैं। पीएम से मिलना और उनका साथ मिलना कामयाबी का बड़ा सबूत है। ये एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
देसाई ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की। उन्होंने अपना 'विजन 2047' बताया, जिसमें दिव्यांग लोगों को ज्यादा ताकतवर बनाने की बात है। कोविंद को ये आइडिया बहुत पसंद आया, उन्हें दिव्यांगों की मदद करने में बहुत दिलचस्पी है।
बाते करते करते AI वाले स्मार्ट चश्मों की बात हुई, जो दृष्टिबाधित लोगों की जिंदगी आसान बना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने चित्रकूट यूनिवर्सिटी के कुलपति स्वामी रामभद्राचार्य से भी इस बारे में बात की। उन्होंने ये चश्मे स्वामी जी को प्रयागराज के कुंभ में गिफ्ट भी किए। इससे VOSAP और यूनिवर्सिटी के बीच काम करने के और भी मौके बनेंगे। यहां हजारों दृष्टिबाधित स्टूडेंट्स पढ़ते हैं और इन सबको ये चश्मे मिलेंगे। VOSAP यहां एक प्रोग्राम भी करने वाला है।
साथ ही, उन्हें VOSAP के 'आर्ट फ्रॉम हार्ट' प्रोजेक्ट के बारे में भी बताया गया। उन्हें एक खूबसूरत कॉफी टेबल बुक गिफ्ट की गई थी, जिसमें बहुत ही अच्छी पेंटिंग्स थीं। पूर्व राष्ट्रपति ने 10 पेंटिंग्स अपने घर और ऑफिस के लिए स्वीकार किया। ये VOSAP के लिए बहुत बड़ी बात है।
देसाई ने IAS, IRS, IPS और दूसरे बड़े अफसरों को ट्रेनिंग देने वाले IIPA में एक बहुत अच्छा सेशन लिया। 80 मिनट के इस सेशन में उन्होंने 'विजन 2047' के बारे में बताया। ये एक ऐसा प्लान है जिसमें भारत में दिव्यांग लोगों को ज्यादा ताकतवर बनाने की बात है। उन्होंने इन अफसरों को इस काम में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। इस सेशन में सेना के बड़े अफसर भी शामिल थे। उन्होंने VOSAP के काम को सपोर्ट किया और जमीनी स्तर पर मदद करने का वादा किया।
इसके अलावा VOSAP के संस्थापक अहमदाबाद में गुजरात के डिएबिलिटी आयुक्त, वी.जे. राजपूत और मिले। उन्होंने दिव्यांग लोगों को सशक्त बनाने के लिए नए-नए तरीकों और रणनीतियों पर बात की। राजपूत ने अपनी कामयाबी बताई, जैसे कि दिव्यांगों के अनुकूल जगहें न बनाने वालों पर जुर्माना लगाना और गुजरात में 21,000 दिव्यांगों को नौकरी दिलवाना। दोनों ने एक समझौता करने पर सहमति जताई ताकि VOSAP ऐप का इस्तेमाल जगहों की सुगम्यता जांचने, नतीजे देखने और आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के लिए किया जा सके।
VOSAP ने दिल्ली-एनसीआर में AI वाले स्मार्ट चश्मों से 300 दृष्टिबाधित बच्चों की जिंदगी बदल दी है। ये स्मार्ट चश्मे आस-पास की चीजें स्कैन करते हैं। पढ़ाई, रोजमर्रा के काम और दूसरी जानकारी देते हैं। इन बच्चों को अब खुद काम करने में आसानी होगी और उनके लिए नए मौके खुलेंगे। इस मौके पर प्रणव देसाई (VOSAP के संस्थापक), राजेश अग्रवाल (भारत सरकार में DePWD के सचिव), सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी (IIPA के डायरेक्टर जनरल) के साथ श्रीधर, दिलीप सिंह, विजय राय और डॉ. उत्तम ओझा जैसे दूसरे महानुभाव भी मौजूद थे।
राम मंदिर की पहली वर्षगांठ पर, VOSAP के संस्थापक प्रणव देसाई अयोध्या गए और दीनबंधु नेत्र अस्पताल में VOSAP से फायदा उठाने वालों से मिले। पिछले 2 सालों में, इस अस्पताल में कल्याणम करोती के साथ मिलकर 4,000 से अधिक लोगों की जिंदगी बदल गई है। पूर्वांचल के 14 जिलों के लोगों को दृष्टि वापस मिली है। राम मंदिर के मुख्य ट्रस्टी महाराज नृत्य महंत गोपाल दास और कमल नयन शास्त्री जी ने VOSAP के सशक्तिकरण और समावेश के काम को आशीर्वाद दिया। प्रणव देसाई ने ट्रस्टियों को कुछ सुझाव दिए और इस इलाके में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की मांग के बारे में जाना। उन्होंने 2025 और उसके बाद भी इस काम में मदद करने का भरोसा दिलाया।
पोरेचा नेत्र अस्पताल में VOSAP के संस्थापक और उनकी टीम ने कई लोगों से बात की जिन्हें फ्री कॉर्निया ट्रांसप्लांट मिला था। उन्होंने आधुनिक मशीनों के बारे में जाना, जिनसे कॉर्निया और रेटिना की जांच और ऑपरेशन होते हैं। आई बैंक के काम से लोगों की जिंदगी कैसे बदल रही है, ये भी समझा। टीम गुजरात के आनंदधाम (अद्रोड़ा गांव) गई, जहां 90 बौद्धिक रूप से दिव्यांग वयस्क रहते हैं और सम्मान से अपनी जिंदगी जीते हैं। मुलाकात के दौरान गाने-बजाने और नाचने-गाने का माहौल था।
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