ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

विकसित देश बनने में जुटे भारत को विश्व बैंक ने किया आगाह, गिनाईं चुनौतियां

विश्व बैंक का कहना है कि भारत में अगर मौजूदा आर्थिक रुझान जारी रहे तो अमेरिका जितनी प्रति व्यक्ति आय का एक चौथाई स्तर हासिल करने में लगभग 75 साल लग जाएंगे।

 विश्व बैंक की रिपोर्ट में मिड इनकम ट्रैप के बारे में बताया गया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में मिड इनकम ट्रैप के बारे में बताया गया है। / X/@WorldBank

विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मौजूदा आर्थिक रुझान जारी रहे तो अमेरिका जितनी प्रति व्यक्ति आय का एक चौथाई स्तर हासिल करने में भी भारत को लगभग 75 साल लग जाएंगे।

वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2024: द मिडिल इनकमट्रैप शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में आने वाले दशकों में उच्च आय वाला राष्ट्र बनने के भारत समेत 100 से अधिक देशों के प्रयासों और उनके सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।

रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि देशों की प्रति व्यक्ति सालाना जीडीपी जब अमेरिकी स्तर के करीब 10 प्रतिशत पर पहुंच जाती है तब उन्हें एक तरह के ट्रैप का सामना करना पड़ता है। आय का यह  स्तर उन्हें मध्यम-आय श्रेणी में रखता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 1990 के बाद से सिर्फ 34 मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाएं सफलतापूर्वक उच्च आय वाली स्थिति में पहुंच पाई हैं। इनमें से एक तिहाई से अधिक देशों को यूरोपीय संघ के एकीकरण या तेल भंडार की खोज से फायदा हुआ था। 

2023 के आखिर तक 108 देशों को मध्यम आय वाले देशों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इन देशों में प्रति व्यक्ति वार्षिक जीडीपी 1,136 डॉलर से लेकर 13,845 डॉलर तक थी। इन्हीं देशों में पूरी दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत आबादी रहती है, जिनमें से दो-तिहाई लोग अत्यधिक गरीबी में रहते हैं। भारत भी इन देशों में शामिल है। 

विश्व बैंक ने 2047 तक भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि 50 वर्षों में इस मुकाम को हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि होगी। भारत से पहले दक्षिण कोरिया 25 वर्षों में ऐसा कर चुका है। 

दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक की चीफ इकनोमिस्ट फ्रांज़िस्का ओहनसोर्गे ने अप्रैल में जोर देकर कहा था कि भारत को 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रोजगार को बढ़ावा देने समेत महत्वपूर्ण सुधार करने की आवश्यकता होगी।

विश्व बैंक ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमित गिल ने आगे की बड़ी चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि आगे की राह और भी कठिन है, इसमें तेजी से उम्रदराज होती आबादी, बढ़ते कर्ज, भयंकर भू-राजनीतिक एवं व्यापारिक परिस्थितियां, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आर्थिक प्रगति जैसी समस्याएं हैं।

गिल ने कहा कि यदि देशों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव नहीं किया तो ज्यादातर देश इस सदी के मध्य तक समृद्ध समाज बनाने में फेल हो जाएंगे। रिपोर्ट में मध्य आय के जाल से बचने के लिए त्रिआयामी दृष्टिकोण का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें निवेश पर फोकस, विदेशों से नई तकनीक हासिल करना और इनोवेशन के साथ संतुलन बनाना शामिल है।
 

Comments

Related