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AAG ढिल्लों वॉशिंगटन की महिला जेल आवास नीति की जांच करेंगी

ढिल्लों ने एक्स पर लिखा कि सिविल राइट्स डिवीजन ने एक और राज्य वॉशिंगटन के खिलाफ जांच शुरू की है जहां पुरुषों को महिलाओं के साथ जेल में रखा जा रहा है। इससे महिलाओं की निजता का उल्लंघन हो रहा है और उन्हें खतरे में डाला जा रहा है।

 न्याय विभाग की सिविल राइट्स डिवीजन की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों न्याय विभाग की सिविल राइट्स डिवीजन की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों / Facebook

अमेरिकी न्याय विभाग की सिविल राइट्स डिवीजन की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने घोषणा की है कि उनका विभाग वॉशिंगटन राज्य की उस नीति की जांच करेगा जिसके तहत महिलाओं की जेल में जैविक पुरुषों को रखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह व्यवस्था महिला कैदियों को असंवैधानिक खतरे में डालती है।

19 मई को अमेरिकी न्याय विभाग ने वॉशिंगटन के गवर्नर बॉब फर्ग्यूसन को सूचित किया कि इस मामले में संघीय जांच शुरू की जा रही है। न्याय विभाग ने अपने बयान में कहा कि न्याय विभाग यह जांच करेगा कि क्या वॉशिंगटन राज्य गिग हार्बर स्थित वॉशिंगटन करेक्शंस सेंटर फॉर विमेन (WCCW) में बंद महिला कैदियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करने का कोई पैटर्न या प्रथा अपना रहा है।

हरमीत ढिल्लों के नेतृत्व वाली सिविल राइट्स डिवीजन इस जांच को संभाल रही है। ढिल्लों ने कहा कि मेरे नेतृत्व में सिविल राइट्स डिवीजन यह अनुमति नहीं देगा कि जेलों या कारागारों में बंद महिलाओं को पुरुष कैदियों की वजह से असंवैधानिक नुकसान के खतरे का सामना करना पड़े।

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की बलि केवल ऐसी विचारधाराओं को खुश करने के लिए नहीं दी जा सकती, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है और जो खतरनाक हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह उन आरोपों की जांच करेगा जिनमें कहा गया है कि वॉशिंगटन करेक्शंस सेंटर फॉर विमेन की महिला कैदियों को क्रूर और असामान्य सजा से सुरक्षा देने वाले संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया। जांच में यौन उत्पीड़न, बलात्कार, छिपकर देखने, यौन डराने-धमकाने और महिला जेल में पुरुष कैदियों को रखने से जुड़े आरोपों की भी समीक्षा की जाएगी।

विभाग ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। यह जांच सिविल राइट्स ऑफ इंस्टीट्यूशनलाइज्ड पर्सन्स एक्ट यानी CRIPA के तहत की जाएगी, जो संघीय अधिकारियों को ऐसी व्यवस्थाओं की जांच का अधिकार देता है जहां कैदियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होने की आशंका हो।

अधिकारियों ने कहा कि पहले भी CRIPA के तहत हुई जांचों के बाद देशभर की जेल व्यवस्थाओं में बड़े सुधार किए गए हैं। 

इस जांच पर बोलते हुए ढिल्लों ने एक्स पर लिखा कि सिविल राइट्स डिवीजन ने एक और राज्य वॉशिंगटन के खिलाफ जांच शुरू की है जहां पुरुषों को महिलाओं के साथ जेल में रखा जा रहा है। इससे महिलाओं की निजता का उल्लंघन हो रहा है और उन्हें खतरे में डाला जा रहा है।

उन्होंने अंत में कहा कि यह न्याय विभाग सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा!
 

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