कई भारतीय मिशनों का कहना है कि केवल भारतीय नागरिक ही सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन करने के पात्र हैं। / demo pic/AI-generated
कई भारतीय डिप्लोमैटिक मिशन की पब्लिश की गई RTI गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक RTI एक्ट, 2005 के तहत एप्लीकेशन देने के हकदार हैं, लेकिन ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) और पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन (PIO) कार्डहोल्डर ऐसा नहीं कर सकते।
टोरंटो में भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने अपने RTI वेबपेज पर बताया है कि इस एक्ट के तहत जानकारी सिर्फ भारत के नागरिकों को ही मिल सकती है और साफ तौर पर कहा है कि OCI और PIO कार्डहोल्डर RTI एक्ट, 2005 के तहत जानकारी मांगने के हकदार नहीं हैं।
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इस्तांबूल में भारत के कॉन्सुलेट जनरल ने भी ऐसी ही बात कही है कि एप्लीकेशन देने वालों को भारतीय नागरिकता का दस्तावेजी सबूत देना होगा, जैसे उनके पासपोर्ट के पर्सनल जानकारी वाले पेजों की कॉपी। कोपेनहेगन में भारतीय दूतावास भी भारतीय नागरिकता का सबूत मांगता है और वैध भारतीय पासपोर्ट को स्वीकार्य दस्तावेज के तौर पर लिस्ट करता है।
इन सभी मिशन में, विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक नागरिकता का सबूत देने पर RTI एप्लीकेशन दे सकते हैं, जबकि OCI और PIO कार्डहोल्डर ऐसा नहीं कर सकते।
24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से दी गई सफाई के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया है। MEA अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, न कि नागरिकता का पक्का सबूत। उन्होंने कहा कि नागरिकता पासपोर्ट एक्ट, 1967 के बजाय सिटिजनशिप एक्ट, 1955 के तहत तय होती है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि सरकार का रुख मौजूदा कानून के मुताबिक है। बॉम्बे हाई कोर्ट समेत कई अदालतों ने माना है कि पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, न कि नागरिकता का सर्टिफिकेट। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 26 जून को X पर एक पोस्ट में MEA के रुख को 'बिना किसी अंतर वाला फर्क' बताया और कहा कि आम नागरिक के लिए इसका कोई मतलब नहीं है।
The recent statement by the Ministry of External Affairs (MEA) - - on #PassportSevaDivas, no less! - - clarifying that an Indian passport is primarily a "travel document and not conclusive proof of citizenship" has triggered a predictable wave of public bewilderment and…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 26, 2026
थरूर ने लिखा कि पासपोर्ट पाने के लिए नागरिकों से पुलिस वेरिफिकेशन और डॉक्यूमेंट की जांच करवाना और साथ ही यह कहना कि पासपोर्ट नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, 'एक अजीब कानूनी विरोधाभास पैदा करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आधार पहचान और पते का सबूत है, नागरिकता का नहीं, जिससे कई भारतीयों के पास ऐसा कोई एक भी डॉक्यूमेंट नहीं है जिसे कानूनी तौर पर राष्ट्रीयता का पक्का सबूत माना जाए।
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