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H-1 B वीजा के खिलाफ क्यों हैं रामास्वामी? छात्रों के तीखे सवालों का दिया जवाब

विवेक रामास्वामी  का मानना है कि एच-1बी वीजा से उस शख्स को कोई फायदा नहीं होता, यह सिर्फ कंपनियों के फायदे की चीज है।

अमेरिका में रिपब्लिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति के उम्मीदवार रहे भारतीय मूल के बिजनेसमैन विवेक रामास्वामी ने एशविले में उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों को संबोधित किया। छात्रों ने उनसे एच-1 बी वीजा कार्यक्रम को लेकर उनके पुराने बयानों का जिक्र किया और पूछा कि आप भारतीय होने के बावजूद उनके मुंह क्यों मोड़ रहे हैं? जवाब में रामास्वामी ने जोर दिया कि हमें उन अप्रवासियों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो अमेरिका को लाभ पहुंचाए। बता दें कि अमेरिकी चुनाव के दौरान जब वे रिपबल्किन पार्टी से राष्ट्रपति कैंडिडेट थे, तो उन्होंने एच-1 बी वीजा की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने यह तक कहा था कि अगर वे राष्ट्रपति निर्वाचित होते हैं तो वे इसे हमेशा के लिए बंद कर देंगे।

विवेक रामास्वामी  का मानना है कि एच-1बी वीजा से उस शख्स को कोई फायदा नहीं होता, यह सिर्फ कंपनियों के फायदे की चीज है। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारी कंपनी का सिर्फ गिरमिटिया बनकर रह जाता है। जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था तब लाखों भारतीय मजदूरों को कागज पर अंगूठे का निशान लेकर अफ्रीका और अन्य देशों में काम के लिए भेज दिया जाता था। इन मजदूरों को गिरमिट कहा जाता था। रामास्वामी ने कहा कि अगर आप किसी कंपनी में एच-1 बी वीजा के तहत आते हैं और काम करते हैं तो आप कहीं और नहीं जा सकते। इस तरह के नियम मुझे सही नहीं लगते।
 
बीते दिनों, एशविले में उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने भारतीय समुदाय के लिए कार्यक्रम के महत्व और रामास्वामी के इससे संबंधों पर जोर दिया। छात्र ने पूछा, "आपको यह कहते हुए सुना गया है कि जो लोग अपने परिवार के पीछे इस देश में आते हैं, वे योग्य नहीं है और उन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। आप भारतीय समुदाय के व्यक्तियों से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं?" 

जवाब में रामास्वामी ने कहा, “यदि आपको अपना एच-1बी वीजा मिलता है और आपको एक कंपनी द्वारा काम पर रखा जाता है, तो आप एक गुलाम की तरह हैं। आप किसी दूसरी कंपनी में नहीं जा सकते। ” उन्होंने इस प्रणाली के बजाय अधिक योग्य प्रक्रिया की वकालत की। रामास्वामी ने अमेरिका में उनके योगदान के आधार पर अप्रवासियों के चयन की बात की। कहा, “मेरा मानना ​​है कि हमें उन अप्रवासियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो अमेरिका को लाभ पहुंचाएं। लेकिन यह वह मानक नहीं है जिसका हम आज उपयोग कर रहे हैं।'' उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें इसे बंद करने की जरूरत है।

रामास्वामी के बयान ने इंटरनेट पर बहस को तेज कर दिया है। एक एक्स यूजर ने उनके वीडियो साझा किया और टिप्पणी की, "एच1बी वीजा नहीं दिया जाता है तो आपको एक योग्य नौकरी प्राप्त करनी होगी और फिर लॉटरी से गुजरना होगा।" एक अन्य ने इस कार्यक्रम पर ही सवाल उठाए और एच-1बी वीजा धारकों के सामने आने वाली बाधाओं पर चिंता व्यक्त की।

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