भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल / UN
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों की निंदा की और फ्री नेविगेशन को फिर से शुरू करने की मांग की है। होर्मुज स्ट्रेट भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि कमर्शियल शिपिंग को मिलिट्री हमलों का टारगेट नहीं बनाया जाना चाहिए, और ऐसी कोशिशें बहुत बुरी हैं।
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पटेल ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन ईरान की तरफ इशारा करते हुए याद दिलाया कि भारत ने बहरीन के लाए गए काउंसिल के एक प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर किया था, जिसमें मिडिल ईस्ट पड़ोसियों पर तेहरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में यह बताना जरूरी है कि भारत ने यूएनएससी प्रस्ताव 2817 को को-स्पॉन्सर किया था, जिसे 11 मार्च को अपनाया गया था।
बता दें, ईरान ने भारतीय जहाजों और वहां जा रहे एक जहाज पर हमला किया है। इसके साथ ही दूसरे देशों के जहाजों पर हमलों में कम से कम तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं। दूसरी तरफ अमेरिका ने होर्मुज इलाके में नाकाबंदी कर दी।
पटेल ने मिडिल ईस्ट के हालात पर काउंसिल प्रेसिडेंट बहरीन की बुलाई मीटिंग में कहा कि हम इस बात पर जोर देते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को टारगेट करना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट के रास्ते से बिना किसी रोक-टोक वाली शिपिंग बेहद जरूरी है। यह भारत के लिए एक अहम कनेक्टिविटी का रास्ता है। यहां से भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला भौगोलिक रूप से जुड़ी हुई हैं। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लगभग 10 मिलियन भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहते और काम करते हैं; उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सबसे जरूरी है।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की अपील करते हुए, उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट हमारा सबसे करीबी पड़ोस है और इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में हमारा बहुत बड़ा हिस्सा है।
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