ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले प्रवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत नागरिकता आवेदन शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की जाएगी और अधिकांश शुल्क छूट खत्म कर दी जाएंगी।
22 जून को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी DHS द्वारा जारी प्रस्तावित नियम के अनुसार अमेरिकी नागरिकता के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म N-400 की फीस कागजी आवेदन के लिए 760 डॉलर से बढ़ाकर 1,330 डॉलर कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए यह शुल्क 710 डॉलर से बढ़कर 1,280 डॉलर हो जाएगा।
इसके अलावा नागरिकता आवेदन खारिज होने पर अपील करने की फीस भी 830 डॉलर से बढ़ाकर 1,475 डॉलर करने का प्रस्ताव है। हालांकि यह नियम अभी लागू नहीं हुआ है। DHS ने इस पर 60 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि शुरू की है। इसके बाद प्राप्त सुझावों की समीक्षा कर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
DHS ने अपने प्रस्ताव में कहा कि पिछली सरकारें नागरिकता को बढ़ावा देने और प्रवासियों के एकीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए आवेदन शुल्क को वास्तविक लागत से कम रखती थीं। लेकिन विभाग का मानना है कि अब नागरिकता आवेदन को अन्य आव्रजन सेवाओं की कीमत पर सब्सिडी नहीं दी जानी चाहिए।
प्रस्ताव के तहत कम आय वाले आवेदकों को मिलने वाली अधिकांश शुल्क छूट और रियायती फीस योजनाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी। वर्तमान में कई प्रवासी आय, आर्थिक कठिनाई या सरकारी सहायता प्राप्त करने के आधार पर पूरी फीस माफी के पात्र होते हैं। कुछ आवेदकों को कम आय होने पर रियायती शुल्क का विकल्प भी मिलता है।
यदि नया नियम लागू होता है, तो ये सुविधाएं लगभग पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। केवल वर्तमान और पूर्व अमेरिकी सैन्य कर्मियों को छूट मिलती रहेगी। आव्रजन अधिकार समूहों ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है। उनका कहना है कि बढ़ी हुई फीस कई पात्र स्थायी निवासियों यानी Green Card Holder को नागरिकता के लिए आवेदन करने से हतोत्साहित कर सकती है।
अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल के वरिष्ठ फेलो एरन राइखलिन-मेलनिक ने कहा कि यह बदलाव नागरिकता को बढ़ावा देने की लंबे समय से चली आ रही नीति से अलग है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पूर्व अधिकारी डग रैंड ने भी प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि इससे कानूनी प्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करना और कठिन हो सकता है।
इस प्रस्ताव का असर भारतीय मूल के लोगों पर भी पड़ सकता है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रोजगार, पारिवारिक या अन्य आव्रजन श्रेणियों के माध्यम से ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के बाद अमेरिकी नागरिकता हासिल करते हैं। अब DHS 60 दिनों तक जनता की राय लेगा। इसके बाद विभाग तय करेगा कि इन प्रस्तावित बदलावों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाए या नहीं।
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