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वरिष्ठ संवाददाता
सांकेतिक तस्वीर / Unsplash
मातृ दिवस हम वर्षों से मनाते आ रहे हैं। यह दिवस उन माता-पिता को बधाई देने का सबब बन गया है जो आपको इस दुनिया में लेकर आए हैं। लेकिन सच तो यह है कि मां हर दिन सम्मान की हकदार है। हिंदी सिनेमा ने भी हमें कई ऐसे गाने दिए हैं जो आत्मीय, चंचल, मार्मिक और न जाने कितनी ही सशक्त भावनाओं से भरे पड़े हैं जिन्हे आप कभी भी गुनगुना सकते हैं। आज ऐसे ही कुछ गानों की याद...
मेरी मां... तारे जमीं पर
आमिर खान के निर्देशन में बनी पहली फिल्म से पहले बहुतों ने 'डिस्लेक्सिया' शब्द भी नहीं सुना था। फिल्म तारे जमीं पर...सलमान खान द्वारा सुझाया गया नाम है। इसी फिल्म ने बहुतों को सीखने के विकार से परिचित कराया और हर मातृ दिवस की प्लेलिस्ट में 'मेरी मां' आ गया। इस गाने को प्रसून जोशी ने लिखा। शंकर महादेवन ने गया। एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंका के साथ संगीतबद्ध किया गया यह गीत उस आठ वर्षीय बच्चे की पीड़ा को व्यक्त करता है जिसे लगातार खराब ग्रेड के कारण बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था। ईशान (दर्शील) पहली बार अपनी मां से अलग हुआ। वह जैसे ही अंधेरे और ऊंचाइयों के बारे में अपने डर को व्यक्त करता है तो आंखें भर आती हैं क्योंकि यहां शब्दों से ज्यादा भावनाएं बोलती हैं। दर्शील सफारी हमें अपने साथ रुलाता है।
लुक्का छुपी... रंग दे बसंती
इस गीत ने लता मंगेशकर की आंखों में भी आंसू ला दिए थे क्योंकि उन्होंने उस मां के दुख को व्यक्त किया था जिसने एक विमान दुर्घटना में अपने जवान बेटे को खो दिया था। संगीतकार एआर रहमान के साथ युगल गीत 'लुक्का छुपी' इसलिए दिल को छू जाता है क्योंकि हम सभी ने जीवन में कभी न कभी अपने किसी प्रियजन को खोया है। लिहाजा लुक्का छिपी का यह खेल बहुत सारी त्रासद यादें ताजा कर देता है। इस दार्शनिक गीत को भी प्रसून जोशी ने शब्द दिये। जोशी कहते हैं कि लता मंगेशकर की भावपूर्ण प्रस्तुति से उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। यह गीत 'सर्वश्रेष्ठ मूल गीत' श्रेणी में ऑस्कर के लिए प्रतिस्पर्धा में था क्योंकि इसका प्रभाव देश की सीमाओं के पार था।
मम्मी और मम्मी तू कब सास बनेगी... खट्टा मीठा
बासु चटर्जी की 1978 की फिल्म एक तुर्की फिल्म बिजिम ऐले (हमारा परिवार) से प्रेरित थी। खट्टा मीठा एक हंसी का धमाल है और यह गाना उस दौर में सभी उम्र के लड़कों के बीच तुरंत हिट हो गया था। उनके बीच भी जो उस समय शादी के बारे में सोचने लायक भी नहीं थे। फिर भी वो अपनी मां के पीछे गुनगुनाते रहते थे... मम्मी ओ मम्मी, तू कब सास बनेगी। गुलजार के शब्द, किशोर कुमार की जादुई आवाज और देवन वर्मा की हास्य प्रतिभा ने राजेश रोशन की इस रचना की सदाबहार सफलता में योगदान दिया।
जनम जनम... फटा पोस्टर निकला हीरो
राजकुमार संतोषी द्वारा लिखित और निर्देशित फटा पोस्टर निकला हीरो उनकी ही एक क्लासिक अंदाज अपना अपना फिल्म की तर्ज पर है। पाकिस्तानी कलाकारों पर सांस्कृतिक प्रतिबंध लगने तक आतिफ असलम टिप्स म्यूजिक के पोस्टर बॉय थे। उनकी आवाज के अलावा जो चीज इस गाने को मां के अन्य गीतों से अलग करती है वह हैं पद्मिनी कोल्हापुरे। यह फिल्म पद्मिनी की बड़ी बॉलीवुड वापसी थी।
मेरी प्यारी अम्मी... सीक्रेट सुपरस्टार
आमिर खान प्रोडक्शन की एक और फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार का एक और गाना 'मेरी प्यारी अम्मी' मेघना मिश्रा द्वारा गाया गया है और अमित त्रिवेदी द्वारा संगीतबद्ध किया गया है, जिन्होंने इसे कौसर मुनीर के साथ लिखा था। यह गीत बताता है कि वास्तव में मां क्या होती है। यानी आपकी दोस्त और आपके सपनों को पूरा करने के लिए कोई भी कुर्बानी देने वाली।
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