USCIS / IANS
अमेरिका के यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने 28 अप्रैल को एक अंतरिम अंतिम नियम जारी किया जिसके तहत शरण आवेदन से जुड़े नए शुल्क और सख्त कार्रवाई के प्रावधान लागू किए गए हैं। यह नियम 2025 के HR 1 Reconciliation Act के तहत लाया गया है जिसे One Big Beautiful Bill Act भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य इमिग्रेशन व्यवस्था के लिए अधिक धन जुटाना और खर्च का बोझ आवेदकों पर डालना है।
वार्षिक शरण शुल्क (AAF) अनिवार्य
नए नियम के अनुसार शरण के लिए आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को हर कैलेंडर वर्ष Annual Asylum Fee (AAF) यानी वार्षिक शरण शुल्क देना होगा जब तक उनका आवेदन लंबित रहेगा। अगर यह शुल्क सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर जमा नहीं किया जाता, तो USCIS आवेदन को खारिज कर देगा। जिन लोगों के पास वैध कानूनी स्थिति नहीं है उनके खिलाफ निष्कासन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
वर्क परमिट भी तुरंत खत्म होगा
इस नियम का असर केवल शरण आवेदन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि किसी व्यक्ति ने शरण आवेदन के आधार पर फॉर्म आई-765 यानी काम करने की अनुमति के लिए आवेदन किया है तो USCIS उसे भी अस्वीकार कर देगा। जिन लोगों को पहले से वर्क परमिट मिल चुका है उनकी कार्य अनुमति तुरंत समाप्त हो जाएगी।
पहले भी जोड़ा गया था फॉर्म आई-589 शुल्क
यह प्रावधान 22 जुलाई 2025 की फेडरल रजिस्टर अधिसूचना के बाद आगे बढ़ाया गया है जिसमें फॉर्म आई-589 के लिए पहली बार फाइलिंग शुल्क और हर साल लगने वाला AAF शुल्क जोड़ा गया था। इस कानून के तहत शरण आवेदन, वर्क परमिट और अन्य इमिग्रेशन लाभों पर भी नए शुल्क लगाए गए हैं जबकि शुल्क माफी की सुविधा बहुत सीमित रखी गई है।
अन्य नए बदलाव
नए नियम में यह भी तय किया गया है कि अगर फॉर्म आई-589 गलत तरीके से भरा गया हो और आवेदन खारिज हो जाए तब भी उसकी फाइलिंग फीस वापस नहीं की जाएगी। इसके अलावा टेंम्परेरी प्रोट्रेक्टिड स्टेट्स (TPS) लाभार्थियों के लिए रोजगार अनुमति अब केवल एक वर्ष या उनके बचे हुए TPS अवधि तक ही मान्य होगी, जो भी कम हो।
फॉर्म आई-102 के लिए भी अब मौजूदा शुल्क के अलावा कम से कम 24 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
नियम 29 मई से लागू होगा
यह अंतरिम अंतिम नियम 29 मई से लागू होगा। उस तारीख के बाद अगर फॉर्म आई-102 बिना जरूरी शुल्क के भेजा गया तो USCIS उसे स्वीकार नहीं करेगा। इसके साथ ही लंबित शरण आवेदनों को भी AAF शुल्क न भरने पर खारिज किया जाना शुरू हो जाएगा। डीएचएस ने कहा है कि इस नियम पर 29 जून तक आम जनता अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे सकती है।
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