चटर्जी ने वेलनेस और बचावकारी स्वास्थ्य सेवा में योग की भूमिका पर भी चर्चा की। / X/@IndiaInShanghai
चीन में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर सिद्धार्थ चटर्जी ने शंघाई में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह के दौरान अपनी किताब 'माई फाइव टू थ्राइव' (My Five To Thrive) लॉन्च की और व्यक्तिगत सेहत और बीमारियों से बचाव में योग की भूमिका पर बात की।
शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने 21 जून को यह कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें लगभग 400 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें राजनयिक, शिक्षाविद, योग करने वाले, भारतीय समुदाय के लोग और चीन में भारत के दोस्त शामिल थे।
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शंघाई के वॉटरफ्रंट स्काईलाइन के नजारे वाले 'बंड फाइनेंस सेंटर' में आयोजित इस कार्यक्रम की थीम "स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) थी। महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने कहा कि योग दुनिया को भारत का तोहफा बना हुआ है और उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सेहत और सक्रिय बुढ़ापे को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ की सिस्टर सपना के नेतृत्व में गाइडेड मेडिटेशन सेशन और योग का प्रदर्शन शामिल था, जिसमें सांस लेने के व्यायाम, आसन और ध्यान की तकनीकें दिखाई गईं।
कार्यक्रम में मणिपुरी नृत्य के ज़रिए भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई गई। यह नृत्य 'खोंगजोम लाल' से प्रेरित था, जो 1891 की खोंगजोम की लड़ाई से जुड़ी एक पारंपरिक गाथा है। इस प्रस्तुति ने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया।
बांसुरी वादक रजत प्रसन्ना की शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति, जिसमें तबला वादक और चीनी संगीतकार भी शामिल थे, ने इस समारोह में भारत-चीन सांस्कृतिक मेल-जोल का रंग भर दिया। शंघाई का यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले पूर्वी चीन में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित योग कार्यक्रमों की श्रृंखला का समापन था।
प्रतिभागियों ने पूरे सेशन के दौरान सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जिससे एक संपूर्ण वेलनेस प्रैक्टिस के तौर पर योग में उनकी गहरी दिलचस्पी दिखी। कार्यक्रम ने पारंपरिक स्वास्थ्य और वेलनेस सिस्टम की साझा समझ के ज़रिए भारत और चीन के बीच बढ़ते सांस्कृतिक जुड़ाव को भी रेखांकित किया। अधिकारियों ने आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में योग के प्रसार को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासों का ज़िक्र किया।
संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बाद 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। अब यह सालाना कार्यक्रम दुनिया भर के देशों में मनाया जाता है।
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