शोभिता पार्थसारथी / University of Michigan
सोसाइटी फॉर सोशल स्टडीज ऑफ साइंस (4S) एक अंतरराष्ट्रीय नॉन-प्रॉफिट संस्था है जो साइंस और टेक्नोलॉजी स्टडीज (STS) में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। इसने भारतीय-अमेरिकी स्कॉलर शोभिता पार्थसारथी को प्रेसिडेंट-इलेक्ट (अगली अध्यक्ष) चुना है।
पार्थसारथी तीन साल तक लीडरशिप की भूमिका निभाएंगी - अक्टूबर 2026 से एक साल प्रेसिडेंट-इलेक्ट के तौर पर और उसके बाद 2027 से 2029 तक दो साल प्रेसिडेंट के तौर पर।
मिशिगन यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी और विमेंस एंड जेंडर स्टडीज की प्रोफेसर, पार्थसारथी यूनिवर्सिटी के 'साइंस, टेक्नोलॉजी, एंड पब्लिक पॉलिसी प्रोग्राम' की डायरेक्टर भी हैं। उनके चुने जाने से वह दुनिया की उन प्रमुख संस्थाओं में से एक की कमान संभालेंगी जो साइंस, टेक्नोलॉजी और समाज के बीच संबंधों की जांच करने पर केंद्रित हैं।
अपने चुनाव के बाद एक बयान में, पार्थसारथी ने कहा कि उनका मकसद अहम ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में STS की भूमिका को मजबूत करना है। इन चुनौतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गवर्नेंस, विशेषज्ञता (एक्सपर्टीज) में लोगों का घटता भरोसा और इनोवेशन का भविष्य शामिल हैं।
पार्थसारथी ने कहा कि STS के लिए यह जरूरी है कि वह हमारे समय के सबसे गंभीर सवालों पर जानकारी दे - जैसे AI और दूसरी उभरती टेक्नोलॉजी को कैसे मैनेज किया जाए, या विशेषज्ञता पर भरोसा क्यों कम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज़ में ह्यूमैनिटीज़ और सोशल साइंसेज़ पर सवाल उठाए जा रहे हैं, मेरा मानना है कि 4S सहयोगियों का समर्थन करने, यह दिखाने कि बेहतर भविष्य के लिए STS की सोच कितनी जरूरी है, और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नए STS कॉन्सेप्ट विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
पार्थसारथी की रिसर्च ज्ञान और विशेषज्ञता की राजनीति, पब्लिक पॉलिसी और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं की पड़ताल करती है। वह 'बिल्डिंग जेनेटिक मेडिसिन: ब्रेस्ट कैंसर, टेक्नोलॉजी, एंड द कंपैरेटिव पॉलिटिक्स ऑफ हेल्थ केयर' और 'पेटेंट पॉलिटिक्स: लाइफ फॉर्म्स, मार्केट्स, एंड द पब्लिक इंटरेस्ट इन द यूनाइटेड स्टेट्स एंड यूरोप' जैसी किताबों की लेखिका हैं।
उनकी मौजूदा किताब का प्रोजेक्ट भारत में साफ-सफाई और माहवारी (menstruation) के नजरिए से समावेशी इनोवेशन की जांच करता है।
4S की लंबे समय से सदस्य रहीं पार्थसारथी ने संस्था के भीतर कई लीडरशिप भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने पहले 4S काउंसिल में स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर काम किया, STSGRAD स्टूडेंट नेटवर्क बनाने में मदद की, बाद में 2014 से 2017 तक काउंसिल में रहीं और इस क्षेत्र के प्रमुख जर्नल्स में एडिटर के तौर पर योगदान दिया है।
1975 में बनी 'सोसाइटी फॉर सोशल स्टडीज ऑफ साइंस' विज्ञान, टेक्नोलॉजी और चिकित्सा के क्षेत्र में अलग-अलग विषयों को मिलाकर की जाने वाली रिसर्च को बढ़ावा देती है और दुनिया भर के रिसर्चर्स और प्रोफेशनल्स को एक साथ लाती है।
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