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नवंबर में आएगी रुश्दी की नई किताब, लेखक पर 2022 में हुआ था जानलेवा हमला

'द इलेवंथ ऑवर' लघु कथाओं का एक संग्रह है जो रुश्दी से जुड़े विषयों और रुचिकर स्थानों की पड़ताल करता है। पुस्तक का अनावरण 4 नवंबर, 2025 को किया जाएगा।

विश्व विख्यात लेखक सलमान रुश्दी। / X image

जानलेवा हमले में बाल-बाल बचे विख्यात ब्रिटिश-अमेरिकी उपन्यासकार सलमान रुश्दी की पहली बड़ी पुस्तक इस वर्ष के अंत में आने वाली है। साल 2022 में एक प्राणघातक हमले में रुश्दी गंभीर रूप से घायल हुए थे। चाकू से किए गए हमले में उनकी एक आंख की रोशनी जाती रही। 

'द इलेवंथ ऑवर' लघु कथाओं का एक संग्रह है जो रुश्दी के विषयों और रुचिकर स्थानों के बारे में है। प्रकाशक के अनुसार कथा-संग्रह का विमोचन 4 नवंबर को किया जाएगा। रुश्दी की आने वाली पुस्तक को लेकर उनके प्रकाशक ने 27 मार्च को यह जानकारी दी।

पेंगुइन द्वारा जारी एक बयान में रुश्दी ने कहा कि इस खंड में तीन उपन्यास, जो पिछले बारह महीनों में लिखे गए हैं, उन विषयों और स्थानों की पड़ताल  करते हैं जो मेरे मस्तिष्क के निकट हैं। मॉर्टेलिटी, बॉम्बे, फेयरवेल (विशेष रूप से कैम्ब्रिज), एंगर, पीस और अमेरिका। 

मुझे खुशी है कि ये कहानियां सेटिंग, कहानी और तकनीक में एक-दूसरे से बहुत अलग हैं फिर भी एक-दूसरे के साथ संवाद में कामयाब होती हैं। और दो कहानियां इस तिकड़ी के लिए प्रस्तावना और उपसंहार के रूप में काम करती हैं।

अपस्टेट न्यूयॉर्क में एक मुकदमे में रुश्दी पर हमला करने वाले हादी मतार को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया गया था। मुकदमे में रुश्दी ने घटना के बारे में स्पष्ट गवाही दी थी। मुकदमे के दौरान मतार की कानूनी टीम ने गवाहों को ईरान के 1989 के फतवे के बाद रुश्दी को उत्पीड़न का शिकार बताने से रोकने की कोशिश की, जिसमें 'द सैटेनिक वर्सेज' में कथित ईशनिंदा पर उनकी हत्या का आह्वान किया गया था।

मतार को रुश्दी पर छह इंच के ब्लेड से लगभग 10 बार वार करने का दोषी पाया गया। हमले में इस्तेमाल हथियार को भी गवाहों और अदालत के सामने पेश किया गया था। न्यू जर्सी के मतार ने पहले मीडिया को बताया था कि उसने 'द सैटेनिक वर्सेज' के केवल दो पृष्ठ पढ़े थे, लेकिन उसका मानना ​​था कि लेखक ने 'इस्लाम पर हमला' किया है।

1988 में उपन्यास प्रकाशित होने के बाद रुश्दी मुक्त भाषण अधिवक्ताओं और उन लोगों के बीच भयंकर रस्साकशी का केंद्र बन गए, जो इस बात पर जोर देते थे कि धर्म, विशेष रूप से इस्लाम का अपमान किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य है। 

रुश्दी मुंबई में पैदा हुए और किशोर अवस्था में ही इंग्लैंड चले गए। रुश्दी अपने दूसरे उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' (1981) से सुर्खियों में आए थे। इस उपन्यास को स्वतंत्रता के बाद के भारत के चित्रण के लिए ब्रिटेन का प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार मिला। लेकिन 'द सैटेनिक वर्सेज' ने उन्हें कहीं अधिक, ज्यादातर अवांछित, ध्यान दिलाया।

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