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रिव्यू: फिल्म ‘तू या मैं’ में वैलेंटाइन डेट का रोमांचक खौफ

दर्शकों को दिखाया गया है कि ये दोनों युवा कंटेंट क्रिएटर्स हैं, लेकिन उनके जीवन के अनुभव और दुनिया बिल्कुल अलग हैं।

फिल्म का सीन / PR

कलाकार: शनाया कपूर और आदर्श गौरव, शैली: रोमांटिक-थ्रिलर, प्लेटफॉर्म: थिएटर्स, रिलीज डेट: 13 फरवरी, आईएएनएस रेटिंग: 4.5 स्टार 

बॉलीवुड निर्देशक बेजॉय नांबियार की नई फिल्म 'तू या मैं' ने रोमांच और रोमांस का ऐसा मिश्रण पेश किया है, जिसे थिएटर में बड़े पर्दे पर देखना खास अनुभव है। फिल्म की कहानी शुरुआत ही तनावपूर्ण माहौल से होती है। शनाया कपूर और आदर्श गौरव अभिनीत पात्र घायल और थके हुए हैं और एक पूल में फंस जाते हैं। उन्हें खुद को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना पड़ रहा है। फिर कहानी फ्लैशबैक में जाती है और बताती है कि ये दोनों पात्र कैसे इस स्थिति में पहुंचे।

दर्शकों को दिखाया गया है कि ये दोनों युवा कंटेंट क्रिएटर्स हैं, लेकिन उनके जीवन के अनुभव और दुनिया बिल्कुल अलग हैं। मिस वैनिटी एक प्रसिद्ध डिजिटल इन्फ्लुएंसर है, जबकि मारुति उर्फ आला फ्लोपारा एक सपने देखने वाला आम लड़का है, जो पहचान और बड़ी सफलता के पीछे भाग रहा है।

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इसके बाद कहानी में हल्की-फुल्की रोमांस और मस्ती दिखाई जाती है। मारुति मिस वैनिटी का ध्यान खींचने की कोशिश करता है, ताकि वह उसके साथ कोई बड़ा डिजिटल प्रोजेक्ट कर सके। उनकी बातचीत मजेदार होती है। दोनों के बीच का रिश्ता आज के सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया के रोमांस जैसा प्रतीत होता है।

हालांकि, कहानी का यह मजेदार हिस्सा ज्यादा लंबा नहीं रहता। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रोमांस और पार्टनरशिप एक डरावने अनुभव में बदल जाते हैं। दोनों पात्र फंसे हुए हैं और उनका सामना एक खतरनाक मगरमच्छ से होता है। कहानी का दूसरा भाग अचानक थ्रिलर और सस्पेंस की दिशा में मुड़ जाता है। बेजॉय नांबियार ने इस डर और सस्पेंस को बनाने के लिए साउंड डिजाइन, मजबूत कहानी और सटीक निर्देशन का इस्तेमाल किया है। दर्शक अंत तक यह सोचते रहते हैं कि अंत में कौन जीवित बचेगा।

परफॉर्मेंस की बात करें तो, शनाया कपूर ने इस फिल्म में अपनी दूसरी बड़ी भूमिका में आत्मविश्वास और निडरता के साथ अभिनय किया है। उन्होंने ग्लैमर छोड़कर चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई है। शनाया ने हर सीन में अपने प्रदर्शन से दर्शकों को बांधकर रखा है। वहीं, आदर्श गौरव ने अपने किरदार मारुति में सहजता और विविधता दिखाई है। उन्होंने इस किरदार के बोलने के अंदाज, स्वैग और संवेदनशीलता को बेहद नेचुरल तरीके से प्रस्तुत किया है। उनके म्यूजिक वाले पल कहानी में गहराई और वास्तविकता जोड़ते हैं।

फिल्म में अंश और पारुल गुलाटी ने कहानी को मजबूती दी है। अमृता खानविलकर की स्पेशल अपीयरेंस ने कहानी में रहस्य और आकर्षण जोड़ा है। वहीं, पुलिस अधिकारी के किरदार में श्रीकांत मोहन यादव ने भले ही सीमित समय में काम किया हो, लेकिन उनकी उपस्थिति प्रभावशाली रही।

निर्देशक बेजॉय नांबियार ने फिल्म में रोमांस और डर का संतुलन बेहद कुशलता से बनाए रखा है। उन्होंने दर्शकों को रोमांस के साथ डर का अनुभव भी कराया है। मगरमच्छ ने कहानी में सस्पेंस और डर पैदा किया है। नांबियार ने मुख्य कलाकारों से जबरदस्त परफॉर्मेंस ली है, जिससे कहानी भावनात्मक रूप से भी दर्शकों से जुड़ी रहती है।

फिल्म का संगीत युवा दर्शकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका म्यूजिक हिप-हॉप से प्रेरित है, जो फिल्म की ऊर्जा और उत्साह को बढ़ाता है। 'जी लिया' और 'आंखें चार' जैसे रोमांटिक ट्रैक फिल्म में भावनात्मक पल लाते हैं। वहीं एनर्जेटिक '7 बंताईज' कहानी की एनर्जी को बढ़ाते हैं। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के डर और सस्पेंस को बढ़ाता है।

फिल्म के निर्माता आनंद एल. राय और विनोद भानुशाली हैं। 'तू या मैं' दर्शकों को थ्रिलर शैली में नया अनुभव देती है।

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