मैरीलैंड में सिख नेतृत्व के साथ सरदार रमेश सिंह अरोड़ा / Handout
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने मैरीलैंड में सिख समुदाय के नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान में स्थित सिख धार्मिक स्थलों के संरक्षण, तीर्थ यात्रा की सुविधा और समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम की मेजबानी सविंदर सिंह ने की जो श्री अकाल तख्त साहिब धार्मिक मामलों की उपसमिति (अमेरिका) के समन्वयक और मैरीलैंड गवर्नर की अंतरधार्मिक परिषद के सदस्य हैं। कार्यक्रम में क्षेत्र भर से सिख समुदाय के नेता और पेशेवर लोग शामिल हुए।
बैठक के दौरान उपस्थित लोगों ने पंजाब सरकार में एक सिख मंत्री के रूप में अरोड़ा की नियुक्ति का स्वागत किया और इसे पाकिस्तान में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सामुदायिक नेताओं ने ऐतिहासिक सिख गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों के रखरखाव, संरक्षण और नवीनीकरण से जुड़ी कई मांगें रखीं। इनमें ननकाना साहिब भी शामिल था जो सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान है।
अरोड़ा ने सिख विरासत की सुरक्षा के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई और प्रवासी सिख युवाओं से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से अधिक जुड़ने का आह्वान किया।
चर्चा का एक प्रमुख विषय पाकिस्तान में स्थित सिख तीर्थ स्थलों तक पहुंच भी रहा। सविंदर सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव अक्सर सीमा पार धार्मिक यात्राओं को प्रभावित करता है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर तक निर्बाध पहुंच बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह वीजा-मुक्त गलियारा भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान के करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने की अनुमति देता है जो सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।
सविंदर सिंह ने कहा कि इस कॉरिडोर को खुला रखना दुनिया भर के सिखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कई प्रमुख धार्मिक स्थल आज के पाकिस्तान में स्थित हैं।
बता दें कि कार्यक्रम में गुरप्रीत टखर, अमन शेरगिल, बलविंदर सांघा, मेहरबान सिंह, डॉ. जतिंदर सिंह सेखों, सुरजीत सिंह सिद्धू, मनदीप सिंह, बख्शीश सिंह रोपड़, अजीत ढालीवाल सहित कई सामुदायिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सरदार रमेश सिंह अरोड़ा को सम्मानस्वरूप एक शॉल और औपचारिक तलवार (कृपाण) भेंट की गई। प्रतिभागियों ने इसे सिख विरासत के संरक्षण और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
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