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ओलंपिक 2024 : क्या रोहन बोपन्ना तोड़ पाएंगे राजीव राम की जीत का सिलसिला?

राजीव राम भारतीय प्रवासियों के प्रतिष्ठित सदस्यों में से एक हैं जिन्होंने ग्रैंड स्लैम में अमेरिका के लिए कई सम्मान जीते हैं और ओलंपिक खेलों (2016) में रजत पदक भी जीता है। रोहन ने रियो में टेनिस में लिएंडर के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बनने का मौका गंवा दिया। लिहाजा, पेरिस उनका आखिरी मौका हो सकता है।

रोहन बोपन्ना / X@Rohan Bopanna

प्रतिद्वंद्विता (पारंपरिक या अन्यथा) खेल प्रतियोगिताओं को जीवंत बनाती है। आप मानते हैं न कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज की जंग दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों को उत्साहित करती है। उस स्थिति में, हॉकी में भारत-पाकिस्तान का खेल दक्षिण एशियाई समुदाय को अपनी सीटों से खड़ा कर देता है। मगर क्या आपने कभी 1996 के अटलांटा ओलंपिक खेलों के बाद से भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ती टेनिस प्रतिद्वंद्विता के बारे में सोचा है?

व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता के अलावा वे इतनी रोमांचक और जीवंत हो जाती हैं कि राष्ट्रीय गौरव और सम्मान से जुड़ जाती हैं। 1996 के अटलांटा ओलंपिक खेलों में भारतीय स्टार लिएंडर पेस ने पुरुष एकल में पदक दौर में जगह बनाई। सेमीफाइनल में उन्हें मेजबान अमेरिका के आंद्रे अगासी की चुनौती का सामना करना पड़ा।

हालांकि लिएंडर अपने प्रबल प्रतिद्वंद्वी से हार गए लेकिन उन्होंने कांस्य पदक जीतकर इसकी भरपाई की। यह 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक खेलों के बाद किसी भारतीय एथलीट के लिए पहला व्यक्तिगत पदक था।

लिएंडर की हार से प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत हुई जो तब से लगातार बढ़ती जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका अधिकांश प्रतिष्ठित आयोजनों में अपने भारतीय विरोधियों के विरुद्ध विजयी रहा है। 20 साल बाद जब रियो ओलंपिक खेलों में रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्ज़ा की भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी ने सेमीफाइनल में राजीव राम और वीनस विलियम्स का सामना किया तो अमेरिकी अजेय थे। यह भारतीय जोड़ी के लिए टेनिस में 20 साल के सूखे को खत्म करने का सुनहरा मौका था लेकिन कांस्य पदक के खेल में वह चेक गणराज्य की जोड़ी से हार गई।

ओलंपिक टेनिस में भारत के लिए लगातार दूसरे उलटफेर के साथ प्रतिद्वंद्विता समाप्त नहीं हुई। यह ग्रैंड स्लैम में से एक, यूएस ओपन तक बढ़ गई। 2023 यूएस ओपन में रोहन बोपन्ना और उनके ऑस्ट्रेलियाई साथी पुरुष युगल का खिताब राजीव राम और ऑस्टिन क्राजिसेक से हार गए।

टेनिस सर्किट के सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में से एक रोहन बोपन्ना को अभी भी टेनिस में पदक के साथ अपने करियर का अंत होने की उम्मीद है। पुरुष युगल स्पर्धा में उनका मुकाबला एक बार फिर राजीव राम से हो सकता है। इस बार रोहन बोपन्ना की जोड़ी श्रीराम बालाजी के साथ बनेगी। टेनिस प्रतियोगिता 27 जुलाई से आयोजित की जाएगी। रोहन, जो अब 44 वर्ष के हैं, सबसे उम्रदराज हैं जबकि राजीव भी पीछे नहीं हैं क्योंकि उन्होंने इस साल मार्च में 40 वर्ष की उम्र पार कर ली है।

राजीव राम भारतीय प्रवासियों के प्रतिष्ठित सदस्यों में से एक हैं जिन्होंने ग्रैंड स्लैम में अमेरिका के लिए कई सम्मान जीते हैं और ओलंपिक खेलों (2016) में रजत पदक भी जीता है। रोहन ने रियो में टेनिस में लिएंडर के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बनने का मौका गंवा दिया। लिहाजा, पेरिस उनका आखिरी मौका हो सकता है।

200 से अधिक राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों और आईओसी शरणार्थी ओलंपिक टीम के अनुमानित 10,500 एथलीट विश्व मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पेरिस जाएंगे। पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान 32 खेलों में प्रतिस्पर्धा होगी, जिसमें कुल 329 पदक स्पर्धाएँ होंगी।
 

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