चीन में राजदूत विक्रम दोराईस्वामी। / X/@ChinaSpox_India
विक्रम दोराईस्वामी को चीन का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। नई जिम्मेदारी संभालने के लिए वो बीजिंग पहुंच गए हैं। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। उनके अनुभव और कूटनीतिक कौशल से द्विपक्षीय रिश्तों में नई गति आ सकती है।
भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीन में भारत के राजदूत-नामित, विक्रम दोराईस्वामी बीजिंग पहुंचे। विदेश मंत्रालय में एशियाई मामलों के विभाग के उप-निदेशक, ली जियानबो ने उनका स्वागत किया।
दोराईस्वामी शनिवार को शंघाई पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर और अन्य अधिकारियों ने किया था। इसके बाद वह बीजिंग के लिए रवाना हुए थे।
नए भारतीय राजदूत दोराईस्वामी ने अपने लिए एक चीनी नाम ‘वेई जियामेंग’ चुना है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस वार्ता (20 मार्च) में इसकी तारीफ की थी। लिन ने कहा कि ‘भारत के नए राजदूत वेई जियामेंग का चीन स्वागत करता है। उन्हें चीन में अपना पदभार ग्रहण करने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान करने के लिए उस्तुक है।’
मंदारिन भाषा में वेई जियामेंग नाम का सामान्य अनुवाद वेई है, जो एक आम चीनी उपनाम है और जिसका उच्चारण विक्रम के ‘वी’ से मिलता-जुलता है। बहुत पहले, चीनी इतिहास के युद्धरत राज्यों के काल में वेई एक शक्तिशाली राज्य था। वहीं, जिया का अर्थ शुभ या प्रशंसा योग्य, और मेंग का अर्थ गठबंधन है, जिसका व्यापक अर्थ एक शुभ या प्रशंसनीय सहयोगी है।
इन सभी शब्दों का संयुक्त अभिप्राय है- एक ऐसा व्यक्ति जो एक उत्कृष्ट गठबंधन बनाता है। इसका भारत-चीन संबंधों के वर्तमान संदर्भ में कूटनीतिक महत्व है।
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी दोराईस्वामी 1992 बैच के हैं, और वह प्रदीप कुमार रावत की जगह लेंगे। उन्हें जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने का व्यापक अनुभव है। इससे पहले, वे कई महत्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
बीजिंग से पहले, दोराईस्वामी यूनाइटेड किंगडम में भारत के हाई कमिश्नर के तौर पर काम कर चुके हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव रहा है, लेकिन हाल के महीनों में संवाद के जरिए संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।
भारत और चीन के बीच व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में एक अनुभवी राजनयिक के रूप में दोराईस्वामी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली, संवाद को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login