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रॉयल सोसाइटी ऑफ एडिनबर्ग ने मेहुल मलिक को नामित किया फेलो

मेहुल मलिक हेरियट वॉट यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ चेयरमैन हैं।

 मेहुल मलिक क्वांटम फोटोनिक्स में अभूतपूर्व शोध के लिए चर्चित हैं।  मेहुल मलिक क्वांटम फोटोनिक्स में अभूतपूर्व शोध के लिए चर्चित हैं। / courtesy image

चर्चित वैज्ञानिक संस्था रॉयल सोसाइटी ऑफ एडिनबर्ग (RSE) ने भारतीय मूल के क्वांटम भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर मेहुल मलिक को फेलो नामित किया है।  

मेहुल मलिक हेरियट वॉट यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ चेयरमैन हैं। वह क्वांटम फोटोनिक्स में अभूतपूर्व शोध के लिए चर्चित हैं। उनका काम खासतौर से लाइट पार्टिकल्स के इस्तेमाल से एडवांस कंप्यूटर, सेंसिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है।  

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मलिक ने नई जिम्मेदारी पर कहा कि रॉयल सोसाइटी ऑफ एडिनबर्ग का फेलो चुना जाना मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है। मैं RSE के कार्यों में योगदान देने और इस मंच का उपयोग स्कॉटलैंड और व्यापक स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने के लिए उत्सुक हूं।

मलिक ने अब तक क्वांटम ऑप्टिक्स और क्वांटम इंफॉर्मेशन पर 55 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके शोध में क्वांटम एंटैंगलमेंट, क्वांटम नेटवर्क, क्वांटम इमेजिंग और स्ट्रक्चर्ड लाइट जैसे विषय शामिल हैं। 

वह बियॉन्ड बाइनरी क्वांटम इनफॉर्मेशन लैब (BBQ Lab) की अगुआई कर रहे हैं जहां वे क्वांटम इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग, एंटैंगलमेंट और कॉम्प्लेक्स स्कैटरिंग मीडिया पर रिसर्च करते हैं।  

हेरियट वॉट यूनिवर्सिटी में शामिल होने से पहले मलिक ने वियेना विश्वविद्यालय और IQOQI में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्चर के रूप में काम किया है। उन्हें मैरी क्यूरी फेलोशिप भी मिल चुकी है। उन्होंने रोचेस्टर यूनिवर्सिटी से पीएचडी और कोलगेट यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया है। 

रॉयल सोसाइटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रेसिडेंट प्रोफेसर जॉन बॉल ने मलिक सहित सभी नए फेलो का स्वागत करते हुए कहा कि ये सभी अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। उम्मीद है कि अब ये हमें स्कॉटलैंड और पूरी दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।

आरएसई फेलो आर्थिक, शैक्षिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लेते हैं और सरकारी नीतियों को लेकर सुझाव देते हैं। 1783 में स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्था ने विज्ञान, कला, व्यवसाय एवं सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए विशेषज्ञों को सम्मानित किया है। 

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