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कश्मीरी पंडित प्रवासी संगठन ने कश्मीर में ‘सामान्य स्थिति’ के दावों को खारिज किया

संगठन ने आरोप लगाया है कि इस प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ हुए कथित नरसंहार को कमतर दिखाने और समुदाय की लंबे समय से चली आ रही न्याय एवं पहचान की मांगों को कमजोर करने की कोशिश की है।

  78 फ्रीडम टॉवर मियामी में कश्मीरी हिंदू पलायन दिवस पर कैंडल लाइट विजिल 78 फ्रीडम टॉवर मियामी में कश्मीरी हिंदू पलायन दिवस पर कैंडल लाइट विजिल / Handout

विदेशों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने हाल ही में कश्मीर का दौरा करने वाले एक प्रतिनिधिमंडल की आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि यह प्रतिनिधिमंडल घाटी में सामान्य स्थिति का भ्रामक चित्र पेश कर रहा है। एक बयान में कश्मीर हिंदू फाउंडेशन ने कहा कि वह उन लोगों की गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता और निराशा महसूस करता है, जो खुद को कश्मीरी पंडित समुदाय का प्रतिनिधि बताकर कश्मीर में वापसी के लिए अनुकूल माहौल होने का दावा कर रहे हैं।

संगठन ने आरोप लगाया है कि इस प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ हुए कथित नरसंहार को कमतर दिखाने और समुदाय की लंबे समय से चली आ रही न्याय एवं पहचान की मांगों को कमजोर करने की कोशिश की है। फाउंडेशन ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित विस्थापन, उत्पीड़न और सांस्कृतिक नुकसान के प्रभावों से जूझ रहे हैं।

पुनर्वास के लिए अभी भी माहौल सुरक्षित नहीं

संगठन ने उन दावों को भी चुनौती दी कि कश्मीर में हालात इतने सुधर चुके हैं कि बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों की वापसी संभव हो सके। बयान में कहा गया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारी आज भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। संगठन ने कहा कि उनकी अपनी स्वीकारोक्ति के अनुसार, पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारी आज भी गंभीर प्रतिबंधों और असुरक्षा के माहौल में रह रहे हैं। बयान के अनुसार कई कर्मचारी अंधेरा होने के बाद स्वतंत्र रूप से बाहर निकलने में भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते।

नरसंहार की मान्यता पहली मांग

कश्मीर हिंदू फाउंडेशन ने कहा कि समुदाय की सबसे बड़ी मांग कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ हुए कथित नरसंहार की आधिकारिक मान्यता है। संगठन का कहना है कि इसके बाद ही विस्थापित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

शरणार्थी शिविरों का दौरा न करने पर सवाल

फाउंडेशन ने प्रतिनिधिमंडल की आलोचना करते हुए कहा कि उसने जगती, पुरखू और अन्य शरणार्थी बस्तियों का दौरा नहीं किया, जहां आज भी हजारों विस्थापित कश्मीरी हिंदू रह रहे हैं। बयान में कहा गया कि यह भी उल्लेखनीय है कि तथाकथित 'हेरिटेज टीम' को औपचारिक कार्यक्रमों, सरकारी स्वागत, मीडिया कार्यक्रमों और भोजों के लिए पर्याप्त समय मिला, लेकिन उन्होंने उन शरणार्थी बस्तियों का दौरा नहीं किया जहां हजारों विस्थापित कश्मीरी हिंदू आज भी निर्वासन का जीवन जी रहे हैं।

‘सामान्य स्थिति’ का संदेश देने की कोशिश का आरोप

संगठन का कहना है कि दौरे के दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी और कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों ने यह धारणा मजबूत की कि इस पहल का उद्देश्य घाटी में सामान्य स्थिति का संदेश देना था, न कि विस्थापित समुदाय की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना।

गिलानी की प्रशंसा पर भी आपत्ति

कश्मीर हिंदू फाउंडेशन ने कुछ प्रतिभागियों द्वारा अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की सार्वजनिक प्रशंसा किए जाने पर भी चिंता जताई। संगठन का कहना है कि ऐसे बयान उन लोगों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं जो पूरे कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से बोलने का दावा करते हैं।

समुदाय की ओर से किसी को अधिकार नहीं

फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या प्रतिनिधिमंडल को पूरे कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से बातचीत करने या समझौता करने का अधिकार नहीं दिया गया है। संगठन ने कहा कि न्याय, सत्य, आधिकारिक मान्यता और सम्मानजनक पुनर्वास की मांगें पहले की तरह कायम हैं। बयान में कहा गया कि सत्य, न्याय, आधिकारिक मान्यता और सम्मानजनक पुनर्वास की हमारी मांगें गैर-समझौतावादी हैं और आगे भी रहेंगी।

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